अंबाला सिटी। हरियाणा पंजाब को जोड़ने वाले शंभू बॉर्डर पर रविवार को किसानों ने वैसाखी पर्व मनाया। इस दौरान आंदोलन में शामिल महिलाओं ने सुबह गुरुबाणी का पाठी किया। इसके बाद किसानों ने अपनी मांगों के लिए आवाज बुलंद की।
इसके बाद बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर जयंती पर उन्हें किसान नेताओं ने पुष्पांजलि अर्पित की। विभिन्न राज्यों से आए वक्ताओं ने बाबा साहब के विचारों को साझा किया। इसके साथ ही यह भी बताया कि देश में संविधान का महत्व सबसे ऊपर है। वही लोगों के हितों की रक्षा करने का काम करता है। वहीं दूसरी तरफ किसानों ने 17 अप्रैल को रेल रोको आंदोलन को लेकर पूरी तरह से कमर कस ली है।
शंभू बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे किसान मजदूर मोर्चा और संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) के बैनर तलब किसान नेता गांव-गांव में संपर्क कर रहे हैं। खासकर अंबाला व पंजाब से सटे गांवों में किसानों को एकजुट करने की कोशिश की जा रही है। वहीं किसान नेताओं ने रविवार को कार्यक्रम के बाद अपनी बैठक में यह तय कर लिया कि अगर हरियाणा सरकार ने 17 अप्रैल तक तीनों किसान नेताओं को नहीं छोड़ा तो आंदोलन अनिश्चितकालीन होगा।
अन्य उपाय भी हैं तैयार : जलबेड़ा
किसान नेता जय सिंह जलबेड़ा ने चेतावनी भी दी है कि सरकार यह न समझे कि पंजाब में शंभू पर किसान रेल रोकेंगे जरूरत पड़ी तो किसान अन्य स्थानों पर भी रेल मार्ग जाम करने जैसे उपाय भी अपनाए जा सकते हैं। गौरतलब है रेल रोकने को लेकर एक दिन पहले अंबाला जिला की गांव सुल्लर में भारतीय किसान यूनियन शहीद भगत सिंह के नेताओं ने बैठक ली थी। जिसमें आंदोलन की रणनीति भी तैयार की गई थी।
केरल से लौटा प्रतिनिधिमंडल
किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल किसान नेता सरवन सिंह पंधेर के साथ केरल गया हुआ था। केरल में किसान नेता शुभकरण की अस्थि कलश यात्रा लेकर गए थे। इस यात्रा के माध्यम से दक्षिण के राज्यों में किसानों को अपनी समस्याएं बताकर जागरूक किया गया। वहीं यह प्रतिनिधिमंडल अब शंभू बॉर्डर पर लौट आया है।
कलान के ब्लॉक संस्थान केंद्र पर बाबा साहब के चित्र के समक्ष मौजूद लोग। संस्था
कलान के ब्लॉक संस्थान केंद्र पर बाबा साहब के चित्र के समक्ष मौजूद लोग। संस्था
कलान के ब्लॉक संस्थान केंद्र पर बाबा साहब के चित्र के समक्ष मौजूद लोग। संस्था