अंबाला। एक अगस्त को कलेक्टर रेट सरकार ने लागू कर दिए थे। मगर चार दिन बाद भी लोगों की रजिस्ट्री नए व पुराने किसी प्रकार के कलेक्टर रेटों में नहीं हो सकी है। सोमवार को उम्मीद थी कि तहसील में रजिस्ट्री होंगी, मगर लोगों को मायूस होकर वापस लौटना पड़ा। अंबाला छावनी की तहसील में सुबह लोगों के रजिस्ट्री के लिए टोकन तो काट दिए मगर वेबसाइट (वेब हेलरिस) न चलने से कोई काम नहीं हो सका।
यही हाल जिले में अन्य तहसीलों पर दिखाई दिया। पहले तो लोगों को उम्मीद थी कि एक दो घंटे बार पोर्टल चल जाएगा मगर पोर्टल नहीं चला। इस कारण से रजिस्ट्री, इंतकाल, जमाबंदी जैसे रोजाना के कार्य नहीं हो सके। इससे पहले एक अगस्त को सॉफ्टवेयर पर अपडेटेशन को लेकर रजिस्ट्रियां नहीं हो सकी थीं।
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10 से 50 प्रतिशत तक बढ़े हैं कलेक्टर रेट
अंबाला जिला में कई काॅलोनियों व ग्रामीण क्षेत्रों में 10 से 50 प्रतिशत तक कलेक्टर रेट एक अगस्त से बढ़ाए गए हैं। इन बढ़े हुई दरों से स्टांप ड्यूटी भी महंगी हो गई है। इसक कितना असर पड़ा है लोगों को रजिस्ट्री कराते समय ही समझ आएगा। शहरी क्षेत्र में बढ़े हुए कलेक्टर रेट का अधिक प्रभाव देखने को मिलेगा।
छुट्टियां हुई खत्म, नहीं हुई रजिस्ट्री
शहजादपुर के गांव बड़ी बस्सी निवासी नायब सूबेदार बबलू चौहान ने बताया कि उन्होंने अंबाला सिटी में प्लॉट खरीदा है। वह 28 जुलाई कैंट तहसील में चक्कर काट रहे हैं। उनकी छुट्टियां खत्म हो चुकी हैं। रजिस्ट्री के काम के लिए तीन दिन की छुट्टियां बढ़वाईं थी। इनकी पोस्टिंग पुणे में है। ऐसे में वापसी के लिए ट्रेन की टिकट भी कटा ली थी, अभी तक रजिस्ट्री नहीं हुई। अब सेना में मंगलवार को दोबारा अवकाश लेने की कोशिश करूंगा, अवकाश मिलता है तो ठीक है वरना वापस लौटना होगा।
भूख से रहे परेशान
अंबाला सिटी के मंडोर गांव निवासी 62 वर्षीय श्योराण ने बताया कि मुझे जमाबंदी लेनी थी। सुबह साढ़े 10 बजे तहसील में पहुंच गया। काफी देर तक बैठा रहा। घर से भोजन भी नहीं कर के आया था। परेशान हो गया हूं। पहले लगा था कि वेबसाइट चल जाएगी मगर नहीं चली। तहसील में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं देता।
वर्जन
पोर्टल न चलने के कारण कार्य करने में दिक्कत आई। इसमें मुख्यालय से सुधार किया जा रहा है।सुनील कुमार, नायब तहसीलदार