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Ambala News: प्राइवेट स्कूलों की मान्यता का नहीं हो रहा रिव्यू

Fri, 21 Apr 2023 01:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अंबाला
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सतनाम सिंह
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अंबाला सिटी। प्राइवेट स्कूलों के मान्यता के 10 साल पूरे होने के बाद रिव्यू न करवाने का मामला चर्चा में चल रहा है। शिक्षा विभाग कहता है कि प्राइवेट स्कूल मान्यता के 10 साल पूरे होने के बाद खुद ही रिव्यू के लिए पोर्टल पर आवेदन करें ताकि उनके स्कूल का रिव्यू दोबारा से किया जा सके, मगर दूसरी तरफ प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन पहले ही विभाग के इस रूल के खिलाफ हाइकोर्ट से स्टे ले चुकी है।
एसोसिएशन कहती है कि वह जब एक बार स्थाई मान्यता ले चुके तो दोबारा से विभाग का फार्म-टू भरवाने का कोई औचित्य नहीं। वहीं, हैरानी की बात यह है कि किस प्राइवेट स्कूल ने कब मान्यता ली और वह मान्यता के 10 साल कब पूरे करेगा, ऐसा कोई रिकॉर्ड शिक्षा विभाग के पास नहीं है। ऐसे में विभाग ऐसे प्राइवेट स्कूलों पर कैसे कार्रवाई करेगा जो 10 साल मान्यता पूरी होने के बाद भी रिव्यू के लिए अप्लाई नहीं करते। जिले की बात करें तो प्राइमरी व मिडिल में 127 और हाई व सीनियर सेकेंडरी स्तर पर 153 मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूल हैं।
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विभागीय अधिकारियों के अनुसार प्राइवेट स्कूल को अगर मान्यता लिए 10 साल पूरे होते हैं तो उसे विभाग के प्राइवेट स्कूलों के पोर्टल पर फार्म नंबर-टू भरकर रिव्यू के लिए आवेदन करना होता है। इसके बाद पोर्टल के जरिए आए स्कूल का निदेशालय के निर्देशानुसार संबंधित टीम रिव्यू करती है। इस रिव्यू कमेटी में डीईओ, डीईईओ, जिला साइंस विशेषज्ञ, एक स्कूल प्राचार्या होता है। यह चार सदस्यीय टीम जाकर स्कूलों का रिव्यू करती है। रिव्यू के लिए वही सभी बिंदु देखे जाते हैं जो बिंदु मान्यता लेने के दौरान पूरे करने होते हैं। इनमें ग्राउंड, कमरे, पीने का पानी, टॉयलेट, बच्चों की सुरक्षा के मानक समेत अन्य कई बिंदु शामिल होते है।

दरअसल, जब कोई स्कूल मान्यता ले लेता है तो उसका रिकॉर्ड शिक्षा विभाग के पास भी होता है, लेकिन शिक्षा विभाग के पास ऐसा रिकॉर्ड नहीं है। जिससे यह पता चल सके कि कौन सा स्कूल अपनी मान्यता के 10 साल कब पूरे कर रहा है। विभाग को यह नहीं पता कि किस स्कूल का रिव्यू हो चुका है और किसका नहीं। संवाद



जब स्कूल मान्यता लेता है तो फार्म नंबर-टू भरना होता है, मगर दस बाद रिव्यू के लिए भी वही प्रक्रिया करनी पड़ती है। सरकार को रिव्यू के लिए सरल सिस्टम बनाना चाहिए, लेकिन विभाग वह प्रक्रिया अपनाता है, जो मान्यता लेने के लिए शुरुआत में करनी पड़ती है। दो साल पहले भी प्राइवेट स्कूलों ने मान्यता के 10 साल बाद रिन्युअल को लेकर विरोध जताया था। इसको लेकर हाइकोर्ट में भी केस चल रहा है। जिसमें हाइकोर्ट ने स्टे दे रखी है। - प्रशांत मुंजाल, उप प्रधान, हरियाणा प्रोग्रेसिव स्कूल कांफ्रेंस।



जिन स्कूलों को दस साल पूरे हो गए हैं, वह दोबारा रिन्युअल नहीं करवाएंगे, बल्कि रिव्यू होगा। विभाग उन स्कूलाें का रिव्यू कर सकता है, मगर विभाग कहता है कि रिव्यू के लिए फार्म-टू भरना होगा, लेकिन फार्म टू में तो वही प्रक्रिया होता है, जो स्थाई मान्यता लेने के लिए प्राइवेट स्कूल को करनी पड़ती है। दो साल पहले एसोसिएशन ने हाइकोर्ट में केस डाला था। तब सरकार ने पत्र निकाला था कि दस साल पूरे करने वाले स्कूलों का रिन्युअल होगा। वह हाइकोर्ट गए और हाइकोर्ट ने स्टे लगा दी थी। हरियाणा स्कूल एजुकेशन रूल 2003 में रिव्यू लिखा है। रिन्युअल नहीं लिखा। विभाग को रिव्यू की प्रक्रिया सही करनी चाहिए। - कुलभूषण शर्मा,राष्ट्रीय अध्यक्ष, नेशनल इंडिपेंडेंस स्कूल एलाइंस।
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मान्यता के 10 साल पूरे होने पर प्राइवेट स्कूल खुद ही रिव्यू करवाने के लिए पोर्टल पर आवेदन करेगा। स्कूल का रिव्यू करने के लिए चार सदस्यीय कमेटी जिसमें डीईओ, डीईईओ, डीएसएस व एक प्राचार्य होते हैं। विभाग के पास ऐसा रिकॉर्ड नहीं है कि किस स्कूल को मान्यता लिए कितने साल हो गए। 10 साल बाद रिव्यू के लिए आवेदन करना स्कूल की जिम्मेदारी है। - सुरेश कुमार, जिला शिक्षा अधिकारी, अंबाला।
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