अंबाला के जलबेहडा गांव में बारिश के बाद खेतों में लहलहाती गेहूं की फसल। संवाद
- फोटो : katra news
जलबेड़ा। क्षेत्र में बारिश के साथ चली तेज हवाओं ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। गेहूं की फसल की लंबाई अधिक हो चुकी थी, ऐसे में तेज हवा चलने से फसलें एक तरफ झुक गईं हैं। हालांकि किसानों का कहना है कि हवा ने जरूर ही फसलों को प्रभावित किया हो मगर बारिश से राहत मिली है। क्षेत्र के प्रगतिशील किसान राजेश कुमार और राजेंद्र कुमार ने बताया कि वह पिछले 20 दिनों से गेहूं की सिंचाई को रोके हुए थे, क्योंकि उन्हें मौसम विभाग और स्थानीय चर्चाओं से बारिश की उम्मीद थी। उन्होंने कहा कि ट्यूबवेल के पानी की तुलना में बारिश का पानी फसल के लिए कहीं अधिक फायदेमंद होता है। किसान तरसेम सिंह और जयपाल के अनुसार, यदि अब और अधिक बारिश नहीं होती है, तो यह फसल की पैदावार में रिकॉर्ड बढ़ोतरी करेगी।
तेज हवाओं ने बढ़ाई मुश्किल
बारिश के साथ आए तेज तूफान ने कई जगहों पर गेहूं की फसल को जमीन पर बिछा दिया है। किसानों का कहना है कि जिन खेतों में गेहूं की लंबाई ज्यादा थी, वहां फसल गिरने के कारण नुकसान की संभावना है, हालांकि राहत की बात यह रही कि ज्यादातर गेहूं अभी छोटी है। जलभराव की स्थिति को देखते हुए जागरूक किसानों ने तुरंत पाइप लाइनों के जरिए खेतों से अतिरिक्त पानी निकाल दिया है, इससे फसल के बचने की उम्मीद जगी है।
सरकार से क्षतिपूर्ति पोर्टल खोलने की मांग
छह महीने की कड़ी मेहनत पर पानी फिरने के डर से किसान सहमे हुए हैं। किसानों ने सामूहिक रूप से सरकार से गुहार लगाई है कि यदि बारिश और तूफान से नुकसान बढ़ता है तो तुरंत क्षतिपूर्ति पोर्टल खोला जाए। प्रशासनिक स्तर पर विशेष गिरदावरी करवाकर नुकसान का आकलन हो। मुआवजे की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए ताकि संकट के समय किसानों को मदद मिल सके। किसानों का कहना है कि उनकी छह महीने की कमाई दांव पर लगी है। सरकार को चाहिए कि वह पोर्टल तैयार रखे ताकि यदि मौसम और बिगड़ता है, तो किसान अपनी शिकायत दर्ज करा सकें।