अंबाला छावनी के रेल विहार स्थित रेलवे अस्पताल। रेलवे
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अंबाला। रेलवे ने अपने कर्मचारियों और उनके परिवारों को राहत प्रदान की है। अब रेलवे लाभार्थियों के नवजात शिशुओं को इलाज के लिए यूनिक मेडिकल आइडेंटिटी कार्ड (उम्मीद) के बनने का इंतजार नहीं करना होगा। रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कार्ड न होने की स्थिति में किसी भी नवजात का इलाज नहीं रोका जाएगा।
हाल ही में रेलवे चिकित्सा लाभार्थियों के शिशुओं को चिकित्सा उपचार से संबंधित सूचना जारी की गई थी, इसके माध्यम से रेलवे बोर्ड ने सभी प्रधान मुख्य चिकित्सा निदेशकों और उत्पादन इकाइयों को हिदायत दी है। बोर्ड ने कहा है कि आपातकालीन स्थिति में केवल कार्ड न होने के आधार पर इलाज में देरी करना अनुचित है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे इस मामले में मानवीय दृष्टिकोण अपनाएं ताकि रेल कर्मचारियों को किसी भी तरह की कठिनाई का सामना न करना पड़े।
एचएमआईएस के जरिए जल्द बनेगा कार्ड
रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि अस्पताल प्रबंधन सूचना प्रणाली (एचएमआईएस) में नवजात शिशुओं के लिए प्राथमिकता के आधार पर उम्मीद कार्ड जनरेट करने का प्रावधान पहले से मौजूद है, ऐसे में आपात स्थिति में बिना कार्ड के भी नवजात को चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित की जाएंगी। यह मुद्दा रेलवे कर्मचारियों और यूनियन की तरफ से उठाया गया था, इसके बाद रेलवे ने यह राहत दी है। इस आदेश को महानिदेशक रेलवे स्वास्थ्य सेवा की मंजूरी से जारी किया गया है।
रेलवे के इस कदम से उन हजारों रेलकर्मियों को राहत मिलेगी, जिनके घरों में नए मेहमान आए हैं और तकनीकी कारणों से कार्ड बनने में समय लग रहा है।
- पवन कुमार मेहरा, मंडल सचिव, एससी/एसटी रेलवे एम्पलॉयज यूनियन,अंबाला।