527 रुपये के बिल के चक्कर में रेलवे ने पांच करोड़ का भुगतान रोक लिया है। संबंधित विभाग का टोल-मटोल वाला रवैया बोर्ड अधिकारियों के लिए परेशानी का सबब बन गया है।
दर्जनों बार मंत्रणा और नोटिस देने के बाद भी रेलवे ने पांच करोड़ रुपये की सर्विस चार्ज राशि कैंटोनमेंट बोर्ड के न तो खाते में जमा करवाई है और न ही चेक दिया है, वहीं अब मात्र 527 रुपये के बिल के चक्कर में पांच करोड़ का भुगतान रोक दिया गया है।
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ऐसे में रेलवे की ओर से लगातार बरती जा रही ढिलाई को लेकर कैंटोनमेंट बोर्ड अब सख्ती के मूड में है और कोर्ट की शरण में जाने की तैयारी कर रहा है, लेकिन इस पर अंतिम फैसला बोर्ड की बैठक में अध्यक्ष के सामने किया जाएगा ताकि लंबित सर्विस चार्ज के तौर पर देय पांच करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हो सके।
कैंटोनमेंट बोर्ड की जगह पर रेलवे वाणिज्यिक गतिविधियां चला रहा है, इसलिए रेलवे की ओर से कैंटोनमेंट बोर्ड को सर्विस चार्ज का भुगतान किया जाता है जोकि पिछले कई वर्षों से चला आ रहा है, लेकिन पिछले वित्त वर्ष 2024-25 के सर्विस चार्ज पांच करोड़ रुपये के भुगतान के लिए रेलवे आनाकानी कर रहा है।
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रेलवे ने पत्र में 40 हजार अतिरिक्त जुड़े होने की दी जानकारी
संबंधित विभाग का टोल-मटोल वाला रवैया बोर्ड अधिकारियों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। जब बोर्ड ने सर्विस चार्ज के संबंध में रेलवे को पत्र जारी किया तो रेलवे ने इसमें 40 हजार रुपये अतिरिक्त जुड़े होने की जानकारी दी क्योंकि बोर्ड की जमीन पर बनी कुछ इमारतें टूट चुकी थीं और जगह खाली हो चुकी थी।
रेलवे ने 527 रुपये का अड़ंगा डाला
जब बोर्ड ने नई इमारतों का लेख-जोखा रेलवे के समक्ष रखा कि इस पर 70 हजार रुपये का अतिरिक्त सर्विस चार्ज बनता है तो संबंधित विभाग जवाब नहीं दे पाया और इसके बाद रेलवे ने कार्रवाई करते हुए 527 रुपये का अड़ंगा डाल दिया।
कर्मचारियों का अटका वेतन व विकास कार्य
रेलवे से पिछला सर्विस चार्ज न मिलने पर पहले ही कैंटोनमेंट बोर्ड आर्थिक तंगी से गुजर रहा है जबकि इस वित्त वर्ष का सर्विस चार्ज भी देय हो गया है जोकि कुल मिलाकर 10 करोड़ पहुंच गया है, ऐसे में रेलवे के लिए भी मुसीबत बढ़ने वाली है।
वहीं सर्विस चार्ज न मिलने से बोर्ड में कार्यरत लगभग 400 कर्मचारियों की तनख्वाह पर भी संकट के बादल छा गए हैं जबकि नाले व नालियों सहित फुटपाथ आदि का निर्माण भी लंबित कर दिया गया है।
बेवजह उलझा रहे मामला
इस मुद्दे पर जल्द ही होने वाली बोर्ड बैठक में चर्चा की जाएगी और अध्यक्ष की मौजूदगी में अपना पक्ष रखा जाएगा। रेलवे से फंड न मिलने के कारण विकास कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। बेवजह तर्क देकर रेलवे के विभागीय अधिकारी मामले को उलझा रहे हैं। मात्र 527 रुपये के लिए उन्होंने पांच करोड़ रुपये का भुगतान रोका हुआ है जोकि गलत है। - राहुल आनंद शर्मा, सीईओ कैंट बोर्ड, अंबाला।
कैंटोनमेंट बोर्ड के सर्विस चार्ज के लिए संबंधित विभाग से बात हुई है, उनका कहना है कि जल्द ही भुगतान कर दिया जाएगा।- एनके झा, वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक, अंबाला मंडल।