अंबाला। आचार संहिता खत्म होते ही करोड़ों रुपये की अधूरी परियोजनाओं की सौगात अंबाला छावनी के निवासियों को मिलेगी। लगभग दो साल से रुकी परियोजनाओं का लेखा-जोखा तैयार करने में पीडब्लयूडी विभाग जुट गया है। आर्बिट्रेशन से क्लीयरेंस के बाद अधूरी पड़ी परियोजनाओं के पैमाइश व अधूरे पड़े कार्य की रुपरेखा तैयार की जा रही है। इसकी शुरुआत अंबाला-साहा हाइवे पर अंबाला कैंट के नागरिक अस्पताल के नजदीक डाक्टर क्वार्टर्स से की गई है जोकि ढांचा तैयार होने के बाद भी अधूरे पड़े हुए हैं।
यहां विभागीय टीम ने निरीक्षण शुरु कर दिया है। निर्माणाधीन ढांचे सहित अन्य जगह पर होने वाले निर्माण की पैमाइश शुरु कर दी गई है ताकि निर्माण से पहले इसके स्वरुप पर खर्च होने वाली रकम और अन्य सामान की जानकारी जुटाई जा सके। इसके लिए विभाग ने दो टीमों का गठन किया है जोकि कार्यकारी अभियंता की निगरानी में काम कर रही हैं। इसमें उपमंडल अधिकारी सहित कनिष्ठ अभियंताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा नागरिक अस्पताल में 100 बैड की सुविधा को 200 बैड में तब्दील करने का कार्य, अंबाला सिटी में लड़कियों के सरकारी कॉलेज का निर्माण और अंबाला सिटी के मिनी सचिवालय में प्रशासनिक ब्लॉक के अधूरे निर्माण को पूरा करने के लिए सर्वे रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
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आर्बिट्रेशन के दो मामलों पर फैसला जल्द
वहीं दो मामले भी आर्बिट्रेशन के पास पहुंच गए हैं। इसमें चंदपुरा गांव में 100 विद्यार्थियों के लिए बनने वाले होम्योपैथिक कॉलेज और 25 बैड के अस्पताल और लखनौर साहिब में डिप्लोमा कॉलेज में बनने वाले वेटनरी ब्लॉक और पोस्टमॉर्टम ब्लाक का मामला शामिल है। इनका फैसला भी पीडब्लयूडी के हक में आने की उम्मीद जताई गई है। फैसला आते ही इन दोनों परियोजनाओं की आगामी प्रक्रिया भी शुरु हो जाएगी।
कोर्ट में लंबित दो महत्वपूर्ण दो मामले
कोर्ट में अभी दो महत्वपूर्ण मामले विचाराधीन हैं, जिन्हें अभी आर्बिट्रेशन के सुपुर्द नहीं किया गया। इनमें से वार हीरोज स्टेडियम का अधूरा निर्माण और फीफा अप्रूव्ड आर्टिफिशियल टर्फ का मामला लंबित है। वहीं अंबाला कैंट में बनने वाले आर्यभट्ट विज्ञान केंद्र का मामला भी कोर्ट में विचाराधीन है।
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यह थीं करोड़ों रुपये की परियोजनाएं
वार हीरोज स्टेडियम को विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस व अपग्रेड करने के लिए 42 करोड़ 89 लाख 96 हजार 241 रुपये की लागत से अप्रैल 2017 में काम शुरु करवाया गया। इसी प्रकार अंबाला सिटी में लड़कियों के लिए सरकारी कॉलेज के निर्माण का कार्य दिसंबर 2018 में 11 करोड़ 76 लाख 27 हजार 106 रुपये की लागत से, अंबाला छावनी के नागरिक अस्पताल के नजदीक डाक्टरों व कर्मचारियों के लिए 24 करोड़ 98 लाख 94 हजार 984 रुपये की लागत से क्वार्टरों का निर्माण, नागरिक अस्पताल में 22 करोड़ 81 लाख 84 हजार 428 रुपये की लागत से 200 बैड का निर्माण, लखनौर साहिब में 7 करोड़ 61 लाख 35 हजार 940 रुपये की लागत से वेटनरी ब्लॉक का निर्माण और अंबाला सिटी के मिनी सचिवालय में 26 लाख 83 लाख 44 हजार 866 रुपये की लागत से फरवरी 2019 में प्रशासनिक ब्लॉक का निर्माण शुरु किया गया था। अंबाला छावनी में 8 करोड़ 33 लाख 31 हजार 830 रुपये की लागत से आर्यभट्ट विज्ञान केंद्र का निर्माण और मार्च 2021 में 35 करोड़ 92 लाख 55 हजार 955 रुपये की लागत से गांव चंदपुरा में शुरु किए गए होम्योपैथिक कॉलेज का निर्माण अधूरा है।
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आर्बिट्रेशन में गए जिन चार परियोजनाओं का फैसला पीडब्लयूडी के हक में आया था। उनके अधूरे निर्माण का आंकलन शुरु कर दिया गया है। इसके लिए विभाग की दो टीमों का गठन किया गया है। इसकी शुरुआत डाक्टर क्वार्टर्स से की गई है ताकि सही पैमाइश और अधूरे पड़े निर्माण को पूरा करने की रूपरेखा तैयार की जा सके। वहीं आर्बिट्रेशन के दो अन्य मामलों पर भी जल्द ही फैसला आने की उम्मीद है। जबकि दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं से जुड़े मामले अभी कोर्ट में विचाराधीन हैं।
रितेश अग्रवाल, कार्यकारी अभियंता, पीडब्लयूडी।