- तीन माह या सालभर की फीस एकसाथ भरने के लिए नहीं किया जाएगा बाध्य, विभाग ने जारी किए निर्देश
- एनसीईआरटी या एससीईआरटी का निर्धारित पाठ्यक्रम ही करना होगा लागू
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। कोई भी स्कूल अभिभावकों को तीन महीने या साल भर की फीस एक साथ जमा करने के लिए मजबूर नहीं कर सकेगा। शिक्षा विभाग ने निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए यह फैसला लिया है। जिला शिक्षा अधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि फीस का भुगतान केवल मासिक आधार पर ही होगा।
अक्सर देखा गया है कि स्कूल परिसर के भीतर ही किताबें और यूनिफॉर्म बेचकर स्कूल भारी मुनाफा कमाते हैं। नए आदेशों के तहत अब स्कूल के अंदर किसी भी तरह के सामान की बिक्री पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। इसके साथ ही अब स्कूल हर साल बिना किसी ठोस कारण के पाठ्यपुस्तकें नहीं बदल सकेंगे। इससे पुरानी किताबों का उपयोग संभव हो सकेगा।
नियमों का करना होगा पालन
सभी स्कूलों को अब केवल एनसीईआरटी या एससीईआरटी द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम ही लागू करना होगा। प्रत्येक निजी स्कूल को अपने मुख्य द्वार पर पक्के पेंट से अपनी मान्यता का स्तर लिखना अनिवार्य होगा। जिन स्कूलों ने अब तक फॉर्म-6 जमा नहीं किया है वे आगामी सत्र 2026-27 में फीस नहीं बढ़ा पाएंगे। जिला शिक्षा अधिकारी की तरफ से सभी खंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) को निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत उन्हें फील्ड में उतरकर इन निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। विभाग ने साफ कर दिया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों की तुरंत रिपोर्ट भेजी जाए ताकि उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सके।
वर्जन
अभिभावकों की जेब पर पड़ने वाले अतिरिक्त बोझ को कम करना हमारी प्राथमिकता है। पारदर्शिता और नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
- सुधीर कालड़ा, जिला शिक्षा अधिकारी, अंबाला