कैदी और बंदियों ने जेल उपाधीक्षक राकेश लोचन पर मारपीट और धमकी देने के आरोप लगाए हैं। रविवार-सोमवार की घटनाएं बताकर बंदियों ने कोर्ट में मेडिकल कराने की अपील की। इसी आधार पर जेल प्रशासन ने हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे विकास केलेवाला और एनडीपीएस एक्ट के केस में विचाराधीन सिटी बाल्मीकि बस्ती के अमित उर्फ बाबू का सरकारी अस्पताल में मेडिकल कराया। इस दौरान दोनों के साथ आए सहयोगियों ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी कई गंभीर सवाल उठाए।
दोपहर करीब दो बजे विकास केलेवाला और अमित को जेल गार्द मेडिकल कराने के लिए पहुंची। विकास ने बताया कि कुछ दिन पूर्व नानू नामक बंदी ने कोर्ट में एक याचिका लगाई थी, जिसमें जेल की व्यवस्था और बंदियों को मिलने वाली सुविधाओं पर सवाल उठाए गए थे। जेल में उन्हें अलग वार्ड में रखा गया है। डिप्टी जेलर ने उसे बुलाकर कहा कि वह याचिका वापस करवाए। मामले में अपनी संलिप्तता से इंकार किया तो उन्हें बुरी तरह से पीटा और जान से मारने की धमकी दी गई। स्वयं को जान का खतरा बताते हुए विकास ने कहा कि यदि उन्हें कुछ होता है तो इसके लिए जेल प्रशासन जिम्मेदार माना जाए। इस बारे वे जल्द अदालत में याचिका दायर करेंगे। अमित ने कहा कि कुछ दिन पूर्व उनके खिलाफ जेल एक्ट का झूठा मुकदमा दर्ज किया है, जिसमें अवैध मोबाइल और नशा मिलने के आरोप हैं। गुरदीप उर्फ दीपा को इतना पीटा गया कि उसके कान का पर्दा फट गया है, लेकिन इलाज नहीं कराने दिया जा रहा।
पिछले कुछ दिनों में जेल से भारी मात्रा में अवैध मोबाइल, अफीम और अन्य सामान बरामद किया गया है। ये लोग कानून को ठेंगा दिखाकर अपनी मनमर्जी चलाना चाहते हैं। विकास हत्या के केस में सजायाफ्ता है और अमित नशा अधिनियम में बंदी है। विकास अन्य बंदियों को स्टाफ के खिलाफ भड़कता है। इनके साथ किसी ने मारपीट नहीं की। ये प्रशासन पर दबाव बनाना चाहते हैं, ताकि बेलगाम घूम सकें। मेडिकल में क्लीयर हो जाएगा कि इन्हें कोई चोट नहीं लगी। ये जेल प्रशासन के खिलाफ साजिश कर रहे हैं। किसी को कानून से खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा।
- राकेश लोचन, सेंट्रल जेल उपाधीक्षक