स्पोर्ट्स एप्टीट्यूड फिजिकल टेस्ट (स्पैट) में सभी पात्रों की भागीदारी का आंकड़ा प्रिंसिपलों के लिए आफत बन सकता है।
इस बार प्रिंसिपलों को जिम्मा सौंपा गया है कि वे सुनिश्चित करें उनके स्कूल के सभी विद्यार्थी स्पैट के पहले दौर में भाग ले रहे हैं या नहीं। इतना ही नहीं जिन स्कूलों में डीपीआई और पीटीआई नहीं हैं, वहां खेल विभाग इसकी व्यवस्था करेगा। स्पैट के रजिस्ट्रेशन 31 अक्तूबर तक होंगे और पहला दौर स्कूल स्तर पर खेला जाएगा, जिसमें फिजिकल फिटनेस के तीन टेस्ट देने होंगे।
लेकिन इसमें पेच यह है कि सभी पात्र विद्यार्थियों को इस में भाग लेना होगा। अब इसकी जिम्मेदारी स्कूल के प्रिंसिपल को सौंप दी गई है। सूत्र बताते हैं कि कई विद्यार्थी ऐसे हैं, जिनकी खेलों में रुचि ही नहीं है। इतना ही नहीं अंबाला के स्कूलों खासकर सरकारी स्कूलाें में स्पोर्ट्स कल्चर ही नहीं है।
यही कारण है कि स्पैट के पिछले चार संस्करणों में अंबाला की परफॉरमेंस सबसे नीचे रही है। खुद अध्यापक भी मानते हैं कि विद्यार्थियों को जबरन खेल में भागीदारी के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। यदि विद्यार्थी भाग लेते भी हैं तो यह समय की बर्बादी होगी।
उधर, स्कूल स्तर पर होने वाले पहले दौर में यदि शिक्षा विभाग के पास डीपीआई अथवा पीटीआई नहीं हैं तो खेल विभाग को ही इसकी व्यवस्था करनी होगी। खेल विभाग अपने स्तर पर बंदोबस्त करेगा, ताकि स्कूलों में होने वाले पहले दौर के ट्रायल में कोई दिक्कत न हो। गौरतलब है कि स्पैट में 8 से 19 साल तक के सभी बच्चे शामिल हैं।
135 पीटीआई, डीपीआई 35
जिला के सरकारी स्कूलों में पीटीआई और डीपीआई की भारी कमी है। प्राइमरी स्कूलों में पीटीआई हैं, जबकि इसके बाद डीपीआई स्कूलों में खेलों का जिम्मा संभालते हैं। जिला में वर्तमान में 135 पीटीआई हैं, जबकि मात्र 35 के करीब डीपीआई हैं। ऐसी स्थिति में खेल विभाग को स्कूलों में व्यवस्था बनानी ही होगी।