अंबाला सिटी। शहर और छावनी के रिहायशी इलाकों में अस्पताल और स्कूल बिना कंपलाइंस सर्टिफिकेट और नक्शे के अवैध रूप से पनप रहे हैं। इनमें से कई अस्पतालों का भवन तो मानकों के अनुरूप नहीं है।
रिहायशी इलाकों में व्यवसायिक गतिविधियों के लिए अंबाला शहर के शहजादपुर हाउस निवासी अधिवक्ता गोपाल गुप्ता हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने पहले ही उनके घर के आसपास के क्षेत्र में व्यवसायिक कार्य करने वालों से जुड़ी याचिका हाईकोर्ट में दायर की थी। मगर इस मामले में जब प्रशासनिक अधिकारियों ने लटका दिया तो अब वह हाईकोर्ट दोबारा से जाने वाले हैं। वह अब कोर्ट में आदेशों की अवमानना का केस दायर करेंगे। इसमें प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ केस दायर होगा।
हाईकोर्ट में 2022 में दायर की थी याचिका
गोपाल गुप्ता ने बताया कि वर्ष 2022 में उनके घर के आसपास व्यवसायिक गतिविधियां काफी बढ़ गईं। इन व्यवसायिक निर्माणों को नियमों को दरकिनार करते हुए कई मंजिला बनाया जा रहा है। इससे लोगों के घरों में धूप और पर्याप्त हवा तक नहीं आती। इस समस्या पर उन्होंने वर्ष 2022 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इस मामले में 15 से 20 सुनवाई हो चुकी हैं। मामला विचाराधीन है। कुछ अधिकारियों ने मामले पर स्टे दिया है। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने अपने पिछले आदेशों में अधिकारियों की ऐसे मामलों में जवाबदेही तय की है। मगर इसके बावजूद मामले को लटकाया जा रहा है। इन्ही आदेशों में मिली गाइड लाइनों की अवहेलना पर वह हाईकोर्ट में अवमानना की याचिका लगाएंगे।
सर्वोच्च न्यायालय मुख्य सचिवों को भेज चुका दिशानिर्देश
गोपाल गुप्ता ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने सात दिसंबर 2024 के राजेंद्र कुमार बनाम यूपी आवास विकास के आदेश में रिहायशी क्षेत्र में व्यवसायिक गतिविधियों के लिए 12 नियम बनाए हैं। इसमें अगर ऐसे किसी भवन का नक्शा पास होता है तो आवेदक से अंडरटेकिंग लेनी होगी। बिजली, पानी और अन्य कनेक्शन विभाग कंप्लाइंस प्रमाणपत्र होने पर ही जारी करेंगे। विकास जोनल प्लान के हिसाब से होगा, अगर कोई नियम तोड़ता है तो सभी विभाग तालमेल के साथ कार्रवाई करेंगे। इसी प्रकार बैंक लोन भी तभी मिलेगा जब संपत्ति का कंप्लाइंस प्रमाण पत्र होगा। कोर्ट ने फैसले में यह भी लिखा कि अगर कोई नियम तोड़ता है तो उसे अदालत की अवमानना मानी जाएगी। इसके साथ ही इन आदेशों को सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को भेजा था। इसके बाद पिछले महीने 30 अप्रैल को कनीज बनाम साहबुद्दीन केस में इसी फैसले का हवाला देते हुए निर्माण गिराने के आदेश प्राधिकरण को दिए गए थे। इन आदेशों की भी अवहेलना की जा रही है।