अंबाला। कैंटोनमेंट बोर्ड अंबाला (सीबीए) में हुए घोटाले में संलिप्त कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होगी। नवनियुक्त मुख्य अधिशासी अधिकारी ने सख्त कार्रवाई का फैसला लिया है, जिससे कि फिर कोई कर्मचारी बोर्ड की छवि खराब न करे। इसके लिए कैंट पुलिस को सीबीए की ओर से पत्र लिखा है। पत्र में पांच लोगों के नाम लिखे हैं। इसमें टैक्स अधीक्षक सहित एक अन्य कर्मचारी का नाम भी शामिल है, जिनके खिलाफ अभी विभागीय कार्रवाई नहीं हुई है।
प्राप्त जानकारी अनुसार पुलिस के लिखे पत्र में बताया है कि टैक्स अधीक्षक की निगरानी में ही चार कर्मचारी काम कर रहे थे और उनकी ही जिम्मेदारी होती है कि ब्रांच का कार्य सही और सुचारू ढंग से हो। अगर इतने लंबे समय से यह घोटाला चल रहा था तो वो क्यों इसे पकड़ नहीं पाए। जबकि रिकॉर्ड को चेक करने की जिम्मेदारी भी टैक्स अधीक्षक की है।
इसलिए अब तथ्यों के आधार पर टैक्स अधीक्षक सहित चार अन्य कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर की सिफारिश की है, जिससे कि जांच में कोई खामी न रहे और मामला पूरी तरह से स्पष्ट हो जाए। वहीं अब यह भी जानकारी सामने आई है कि टैक्स शाखा के अधीक्षक को निर्देश देने के बाद भी अभी तक उसने न तो दस्तावेज जमा करवाए हैं और न ही पूरा रिकॉर्ड सौंपा है जोकि एक गहरी साजिश की तरफ इशारा कर रहे हैं। ऐसे में दस्तावेजों के साथ छेड़खानी से इंकार नहीं किया जा सकता और इससे विभागीय जांच भी प्रभावित हो सकती है।
यह है पूरा मामला
प्राप्त जानकारी अनुसार 16 जून को शक के आधार पर जब टैक्स ब्रांच के दस्तावेज खंगाले गए तो इन दस्तावेजों में जांच के दौरान कुछ ऐसे तथ्य सामने आए जोकि एक बड़े घोटाले की तरफ इशारा कर रहे थे। जब रैंट ब्रांच की रसीदों का कंप्यूटरीकृत रसीदों से मिलान किया गया तो एक ही नंबर की दो-दो रसीदें पाई गई जोकि आपस में बिल्कुल मिलती जुलती थीं। लेकिन इन फर्जी रसीदों का पैसा विभागीय कर्मचारी अपनी जेब में डाल लेते थे।
तीन कर्मचारियों पर हुई थी कार्रवाई
नकली रसीद पर हजारों रुपये का गबन करने वाले कैंटोनमेंट बोर्ड अंबाला (सीबीए) के तीन कर्मचारियों पर तुरंत प्रभाव से कार्यवाही की गई थी।इसमें एक कर्मचारी को नौकरी से निष्कासित और दो को निलंबित कर दिया गया था। निष्कासित होने वाले कर्मचारियों में टैक्स ब्रांच का क्लर्क सुनील शामिल है जोकि ठेके पर लगा हुआ था। वहीं टैक्स इंस्पेक्टर प्रिंस और टैक्स क्लर्क सरवण को निलंबित किया गया है। जबकि टैक्स अधीक्षक नरेश शर्मा सहित एक अन्य कर्मचारी पर कार्यवाही लंबित कर दी गई थी।
तीन सदस्यीय कमेटी कर रही मामले की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य अधिशासी अधिकारी ने तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया था। इसमें बोर्ड के मुख्य अधीक्षक, इंजीनियिर और एक विभागीय कर्मचारी को जिम्मेदारी सौंपी गई है। टीम की प्राथमिक जांच में जो तथ्य सामने आए थे, उसके आधार पर लगभग 90 हजार रुपये के गबन की बात सामने आई। वहीं उक्त आरोपियों ने अपने जुर्म को कबूल लिया था और गबन की गई राशि को भी जमा करवा दिया है, लेकिन उनके दूसरे कारनामों की जांच जारी रहेगी और पिछले तीन साल का रिकॉर्ड खंगाला जाएगा ताकि गबन की राशि का सही आंकलन किया जा सके।
वर्जन
मामले की गंभीरता को देखते हुए सोमवार को पुलिस को पत्र लिखा गया है ताकि एफआईआर की कार्रवाई हो सके। इसमें पांच कर्मचारियों के नाम दिए गए हैं। अपने स्तर पर भी मामले की जांच विभागीय टीम की ओर से की जा रही है। मामले में संलिप्त किसी भी कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।
राहुल आनंद शर्मा, मुख्य अधिशासी अधिकारी, सीबीए