अंबाला। अखाडों की पुरानी संस्कृति दंगल और पहलवानों की ओर से मिट्टी में करने वाले अभ्यास की परंपरा को बचाने की कवायद महावीर अखाड़ा कर रहा है। पिछले 30 साल से अंबाला छावनी के महावीर अखाड़ा संचालक और कोच दयाराम पहलवान अस्तित्व बचाने के जद्दोजहद में लगे हैं।
उन्होंने बताया कि अंबाला में दो अखाड़े, जिसमें हनुमान अखाड़ा और उनका महावीर अखाड़ा ही ऐसे हैं जोकि मैट के साथ साथ मिट्टी में भी पहलवानों को अभ्यास करवाते आ रहे हैं। उनका कहना है कि आज के समय में पहलवानों और लोगों के शौक गुम हो गए हैं। एक जमाना था जब लोगों की भीड़ को अखाडाें और दंगल में पहलवानों की कुश्ती देखने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती थी लेकिन समय के साथ साथ मैट आया और अतीत में मिट्टी पर होने वाले अखाड़े कम होते चले गए।
इन राज्यों में होते रहे हैं इनामी दंगल
पहले गांव, कस्बों और शहरों में इनामी दंगल मिट्टी में हुआ करते थे। जो अब कम ही देखने को मिलते हैं। पहले पंजाब, महाराष्ट्र, हिमाचल ओर हरियाणा में अधिकतर अखाड़ा दंगल होते रहते थे। इससे पहलवान ज्यादा से ज्यादा अभ्यास करते और अपने आप को मजबूत और ताकतवर बनाते थे। पहलवानों का अपने इलाके में एक अलग ही रसूख होता था। वहीं मैट की कुश्ती ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई और कामयाब हुई। हरियाणा में मैट पर कुश्ती साल में एक बार स्टेट और नेशनल स्तर पर होती है। इसमें अच्छा प्रदर्शन करने वाले पहलवानों का नाम होता है। पहले तो पहलवान सबसे ज्यादा दांवपेच लगाता था उसका सबसे ज्यादा नाम होता था ओर लोग भी उसे ज्यादा पसंद करते थे। लेकिन अब दांवपेच की जगह अंकों ने ले ली है।
अंबाला छावनी के 12 क्राॅस रोड स्थित महावीर के संचालक 70 वर्षीय दयाराम ने बताया कि वह 30 वर्ष से अखाड़ा में बच्चों को कुश्ती के दांव पेच के गुर सिखा रहे हैं। उनके सिखाए हुए बहुत से बच्चे हरियाणा अखाड़ा चैंपियनशिप में स्वर्ण, कांस्य और रजत पदक जीत चुके हैं। मौजूदा समय में उनके पास 20 पहलवान हैं जिन्हें वह मैट और मिट्टी दोनों पर कुश्ती सीखा रहे हैं।
उन्होंने हनुमान अखाड़ा के गुरु जुगल किशोर से कुश्ती के दांवपेंच सीखे। इसके बाद से उन्होंने कई दंगल लडे़ और जीते। वह कुश्ती के लिए जयपुर, शोलापुर, मुंबई, गोवा, लखनऊ व अन्य जगह गए। जहां पर उन्होंने ऑल इंडिया की तरफ से कुश्ती लड़ी और जीत हासिल की। कई बार वह चंडीगढ़ में होने वाले ईनामी दंगल में गए और कुश्ती लड़ी। इस दौरान उनकी वह पोस्टल विभाग में नौकरी लगी और वह दस साल से सब पोस्ट मास्टर के पद से सेवानिवृत हो चुके हैं।