फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जहरीली हुई आबोहवा- वायु गुणवत्ता का पैमाना 292 के पार

विज्ञापन
विज्ञापन
दीपोत्सव आतिशबाजी के चलते अंबाला की आबोहवा जहरीली हो गई। पटाखों के धुएं ने बच्चों और बुजुर्गों के साथ-साथ अस्थमा रोगियों को रातभर सोने नहीं दिया। दीपावली के दिन की बात करें तो अंबाला की वायु की शुद्घता का पैमाना 42 माईक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक और नीचे चला गया। यही कारण रहा कि रविवार के बाद सोमवार को भी ट्विन सिटी वासियों को सांस लेने में दिक्कतें, गले में खराश और आंखों में जलन दिनभर महसूस होती रही। पटाखों की आग के साथ-साथ इसका प्रमुख कारण कूड़े की आग और भारी ट्रैफिक भी माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट और ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशों के बावजूद अंबाला में आज तक कूड़े पर आग लगाने के मामले में एक भी केस दर्ज नहीं किया गया। इसी कारण नगर निगम कर्मचारियों से लेकर दूसरे विभागों के कर्मचारी और सामान्य वर्ग, दुकानदार और व्यापारी तक कूड़े के खात्मे के लिए उसमें धड़ल्ले से आग लगा रहे हैं।
विज्ञापन

यह होना चाहिए शुद्घ वायु का पैमाना
वायु गुणवत्ता की बात करें तो शुद्घ वायु का अधिकतम सूचकांक 60 माईक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक मान्य है। लेकिन अंबाला में 385 सूक्ष्म कण यानी पार्टिकूलेट मैटर ऐसे पाए गए हैं जिनका साईज 2.5 माईक्रोमीटर है। यही कण सबसे ज्यादा जानलेवा साबित होते हैं। इनसे अस्थमा, फेफड़ों का कैंसर, चर्म रोग, आंखों में जलन, खांसी, सांस लेने में दिक्कतें, गले में खराश व अन्य दिक्कतें हो सकती हैं। दिवाली से दो दिन पहले अंबाला की वायु गुणवत्ता 232 माईक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर आंकी गई थी।
जानिए किस तरह बढ़ा चार दिन में प्रदूषण
25 अक्टूबर 232 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर
27 अक्टूबर 343 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर
28 अक्टूबर शाम 4 बजे तक 385 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक
बता दें कि यह डाटा सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड द्वारा जारी किया गया। हर दिन शाम 4 बजे डाटा अपलोड किया जाता है। यानी दिवाली के दिन का डाटा 28 अक्टूबर को अपलोड हुआ। यही कारण है कि 28 अक्टूबर को प्रदूषण का स्तर सबसे ज्यादा।
विज्ञापन

रात भर चलते रहे पटाखे
कोर्ट के आदेशानुसार पटाखे चलाने का समय रात आठ बजे से 10 बजे तक निर्धारित किया गया था लेकिन अंबाला में शाम छह बजे से रात 2 बजे तक पटाखे चलते रहे। इस मामले में जिला प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। यही कारण रहा कि कोर्ट के आदेशों की सरेआम धज्जियां उड़ती रहीं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें