अंबाला। पार्टी के खिलाफ बगावत कर चुनावी रण में कूदने वाले पूर्व मंत्री निर्मल सिंह के खिलाफ प्रदेश कांग्रेस कार्रवाई कर सकती है। कांग्रेस से इस्तीफा दिए बिना ही निर्मल सिंह ने अंबाला सिटी विधानसभा सीट से शुक्रवार को आजाद प्रत्याशी के तौर पर नामांकन पत्र दाखिल किया है। अधिकृत प्रत्याशी की रिपोर्ट के आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई की बात कही जा रही है। प्रदेश कांग्रेस की ओर से उन नेताओं के बारे में भी रिपोर्ट मांगी जाएगी जोकि पार्टी प्रत्याशियों के खिलाफ विरोधियों को समर्थन कर रहे हैं। उधर पूर्व मंत्री निर्मल सिंह की बेटी चित्रा ने नामांकन पत्र दाखिल करने से पहले अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। पार्टी छोड़ने से पहले उन्होंने कांग्रेस के कई बड़े नेताओं से भी जीत का आशीर्वाद लिया।
इस्तीफा दिए बिना दाखिल किया नामांकन
पूर्व मंत्री निर्मल सिंह अभी प्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष हैं जबकि उनकी बेटी एवं पूर्व पार्षद चित्रा के पास राष्ट्रीय महिला कांग्रेस में महासचिव की जिम्मेदारी है। चित्रा ने अंबाला कैंट से पार्टी टिकट के लिए आवेदन किया था। मगर पार्टी हाईकमान की ओर से चित्रा की बजाय वेणु अग्रवाल को टिकट दी गई। इसी बात से खफा होकर पूर्व मंत्री निर्मल सिंह बागी हो गए। वीरवार को कार्यकर्ताओं की आपात मीटिंग बुलाकर उन्होंने खुद अंबाला सिटी व चित्रा को अंबाला कैंट विस सीट से मैदान में उतारने का ऐलान कर दिया था। उन्होंने साफ कहा था कि वे कांग्रेस प्रत्याशियों की जमानत जब्त करवाकर उन्हें हराने का काम करेंगे। शुक्रवार को पिता-पुत्री ने अपने पदों से इस्तीफा दिए बिना ही समर्थकों के साथ अपने नामांकन पत्र दाखिल कर दिए। पार्टी के कई नेता भी इन्हें समर्थन कर रहे हैं।
प्रत्याशियों से लिया जाएगा फीडबैक
कांग्रेस अपने अधिकृत प्रत्याशियों से उन नेताओं के बारे में फीडबैक लेगी जोकि पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त होकर विरोधियों को समर्थन कर रहे हैं। नामांकन पत्र वापस लेने के बाद प्रत्याशियों से ये फीडबैक लेने की बात कही जा रही है। इसके बाद ही उनके खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होगी। अभी पार्टी की ओर से सभी प्रत्याशियों को नामांकन प्रक्रिया पूरी करने के आदेश दिए गए हैं। नामांकन पत्र वापस लेने के बाद ही अगली कार्रवाई तय होगी।
पूर्व मंत्री निर्मल सिंह के मीडिया एडवाइजर नितिन भाटिया ने बताया कि चित्रा सरवारा अपने पद से इस्तीफा दे चुकी हैं। नामांकन पत्र दाखिल करने से पहले उन्होंने राष्ट्रीय कांग्रेस की महिला अध्यक्ष सुष्मिता देव को अपना इस्तीफा भेज दिया था। मंजूरी के बाद ही नामांकन पत्र दाखिल किया गया। पार्टी छोड़ने से पहले कई नेताओं का आशीर्वाद भी लिया गया। भाटिया ने बताया कि पूर्व मंत्री निर्मल सिंह ने अभी अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया है। जल्द ही वे पार्टी हाईकमान को अपना इस्तीफा भेज देंगे।
तुम और चित्रा बहनें हो, जमकर लड़ो चुनाव
अंबाला कैंट से कांग्रेस प्रत्याशी वेणु अग्रवाल ने पूर्व मंत्री निर्मल सिंह व उनकी बेटी चित्रा सरवारा को मनाने की कोशिश की। वेणु खुद निर्मल सिंह के आवास पर उनसे मुलाकात करने गई थी। तब निर्मल सिंह ने उन्हें कहा कि पांच साल पहले मैं भी आपके पास इसी तरह आया था। तब आपने कहा था कि मैं कांग्रेसी नहीं बल्कि सैलजा की समर्थक हूं। यह कहकर आपने मुझे सपोर्ट नहीं किया था। चूंकि इस बार मैं व मेरी बेटी आजाद चुनाव लड़ने जा रहे हैं इसलिए मैं आपको समर्थन नहीं दे पाऊंगा। हालांकि निर्मल सिंह ने वेणु को कहा कि तुम व चित्रा दोनों बहनें हो। डटकर चुनाव लड़ो। जीत तो जिसके भाग्य में होगी उसी को मिलेगी।
टिकटों के बंटवारे को लेकर प्रदेश में कहीं भी विरोध नहीं है। एक-दो सीटों को लेकर बेवजह शोर मचाया जा रहा है । राज्य की 90 सीटों के लिए कांग्रेस के पास 1200 आवेदन आए थे। ऐसे में टिकटें तो 90 को ही मिलनी थी। 1110 लोगों में थोड़ी बहुत नाराजगी रह जाती है। पर इन्हें मना लिया गया। पार्टी लाइन से हटकर अधिकृत प्रत्याशी का विरोध करने वाले नेताओं के खिलाफ अनुशासनहीनता के आरोप में कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए प्रत्याशियों से रिपोर्ट ली जाएगी।
कुमारी सैलजा, प्रदेशाध्यक्ष, कांग्रेस
जिप सदस्य ने चुपचाप छोड़ी पार्टी
वार्ड 6 से कांग्रेस के जिला परिषद सदस्य गुरविंद्र सिंह मानकपुर ने गोपनीय तरीके से पार्टी छोड़कर तुरंत भाजपा का दामन थाम लिया। निवर्तमान विधायक असीम गोयल ने उन्हें भाजपा का झंडा देकर पार्टी में शामिल करवाया। कांग्रेस छोड़ने से पहले गुरविंद्र ने प्रदेश युवा कांग्रेस के महासचिव व कांग्रेस के राजीव गांधी पंचायती राज संगठन के ग्रामीण अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया था। सिटी विधानसभा सीट से हिम्मत सिंह की टिकट कटने के बाद से ही गुरविंद्र कांग्रेस से खफा थे। बताते हैं कि उन्होंने हिम्मत को पार्टी छोड़ने के निर्णय से अवगत करवा दिया था। हालांकि कांग्रेसी व हिम्मत समर्थक उसके निर्णय की कड़ी आलोचना कर रहे हैं।