कैंट के बाजारों में अवैध कब्जों पर कार्रवाई हाईकोर्ट के आदेशों पर हुई। हाईकोर्ट के इन आदेशों और लोकसभा चुनावों को लेकर लगाई गई आचार संहिता के बावजूद कांग्रेस, इनेलो व भाजपा के कुछ नेता मौके पर राजनीति चमकाने पहुंच गए।
इनमें से कुछ नेताओं ने कार्रवाई में पूरी दखलंदाजी दिखाई और अपने प्रभाव से प्रशासनिक कार्रवाई को प्रभावित भी किया।
कई जगह अपने खास लोगों के कब्जों को पूरी तरह तोड़ने से बचाते हुए नजर आए। वहीं कई प्रशासन के साथ पूरी तरह आक्रामक बनकर दुकानदारों का समर्थन जुटाने में लग गए।
राजनीतिक रोटियां सेंकने के चक्कर में एक नेता ने तो एक बार बजाजा बाजार व सदर बाजार में ‘दंगे’ जैसे हालात पैदा कर दिए।
यदि मौके पर तैनात पुलिस मोर्चा न संभालते तो बाजार में पूरी तरह से पत्थरबाजी और याचिकाकर्ता पर हमला करने की तैयारी लगभग हो चुकी थी।
हुआ यूं कि हाईकोर्ट में जनहित याचिका डालने वाले एडवोकेट एसकेएस बेदी जैसे ही बाजार में पहुंचे तो नेता और उनके साथ काफी दुकानदारों ने उन्हें घेर लिया।
नेता ने तो एडवोकेट एसकेएस बेदी को बाजार से तुरंत चले जाने और न जाने पर उनके साथ कुछ भी होने की जिम्मेदारी उनकी खुद की होने से संबंधित चेतावनी दे डाली। नेता की गरमी देखकर बाजार के और दुकानदार भी आक्रोशित हो गए।
याचिकाकर्र्ता एसकेएस बेदी ने नेता व दुकानदारों से कहा कि उन्हें हाईकोर्ट में जवाब देना है, इसलिए वे बाजारों का जायजा लेने आए हैं।
लेकिन नेता और दुकानदारों ने उनके खिलाफ नारेबाजी करते हुए उन्हें बाजार से भगाना शुरू कर दिया। हंगामा देखकर तुरंत एसएचओ जंगशेर सिंह व अन्य पुलिस वालों ने याचिकाकर्ता को बाजार में घेर लिया।
लेकिन नेता व दुकानदार नारेबाजी करते हुए उन्हें बजाजा बाजार से सदर बाजार और वहां से निकलसन रोड पर उनकी कार तक पहुंचाकर की माने।
इस दौरान एक असामाजिक तत्व ने याची पर पत्थर भी उछाला जो एक मीडिया कर्मी पर लगा। लेकिन तभी पुलिस हरकत में आ गई और उन्होंने इस हंगामे को दंगे में बदलने से रोक दिया।