सड़क हादसे की शिकार महिला के शव का पोस्टमार्टम करवाने को लेकर परिजन और पुलिस आमने-सामने आ गई। पुलिस के दाह संस्कार रुकवाने पर परिजन भड़क उठे और मौके पर पहुंचे बलदेवनगर थाने के एसएचओ से हाथापाई करते एसीपी हितेश यादव के साथ भी बदसलूकी।
पुलिस का कहना था कि हादसे में मृत महिला का दाह संस्कार से पहले पोस्टमार्टम होना चाहिए, जबकि परिजनों का कहना था कि वे पोस्टमार्टम नहीं करवाएंगे। मामला एसडीएम के पास पहुंचने पर उन्होंने भी पोस्टमार्टम करवाने के आदेश दे दिए।
इसके बाद स्थिति और बिगाड़ गई। गमगीन परिजनों ने हंगामा खड़ा कर दिया। उधर, डीसीपी ने एसएचओ के साथ हाथापाई की घटना से इंकार किया है।
उत्तेजित लोग इतना ज्यादा भड़क उठे कि एसएचओ बलदेवनगर मुनीष कुमार पर हमला करने पर उतारू हो गए। इस दौरान कुछ लोगों ने उनके साथ हाथापाई शुरू कर दी।
एसीपी हितेश यादव ने बीचबचाव करना चाहा तो लोग बदसलूकी करने लगे। लोगों ने पुलिस का जोरदार विरोध किया। उसके बाद फिर से एसडीएम को हालातों से अवगत करवाया गया। जिसके बाद पुलिस अफसरों ने वहां से निकलना ही उचित समझा।
ऐेसी बनी तनाव की स्थिति
बीते दिन सिटी चडीगढ़ रोड स्थित खन्ना फार्म में पिपली बाजार का रहने वाला परिवार शादी से शरीक होने के बाद घर लौट रहा था। फार्म से बाहर आने के बाद खड़ी गाड़ी में परिवार के सदस्य बैठ गए, लेकिन जैसे ही कैलाश देवी (56) कार में बैठने लगी तो वह पांव फिसलने के कारण नीचे गिर पड़ी।
इसी दौरान वहां से गुजर रहे अज्ञात वाहन की चपेट में आने से वह गंभीर रूप से घायल हो गई। देर रात महिला को शहर सिविल अस्पताल में लाया गया, जहां डाक्टरों ने महिला को मृत घोषित कर दिया। परिवार के सदस्य महिला के शव को घर ले गए। उधर, इसकी सूचना बलदेव नगर पुलिस को भी भेज दी गई।
नियम अनुसार हादसे में मृत को पुलिस कार्रवाई के बाद ही चिकित्सक परिजनों को सौंपते हैं। इसमें अस्पताल की लापरवाही भी सामने आती दिख रही है। पुलिस ने शनिवार सुबह रामबाग श्मशानघाट पहुंचकर महिला के पोस्टमार्टम की बात करते दाह संस्कार रुकवा दिया।
पुलिस के दखल से तनाव की स्थिति पैदा हो गई। काफी देर तक शव वहीं पड़ा रहा। अंतत: घरवालों का सब्र टूट गया और वहां पुलिस का विरोध करना शुरू कर दिया।
पुलिस मान रही डाक्टरों की गलती
पुलिस इस पूरे मामले में नियमों की अवहेलना और इस तनावपूर्ण स्थिति के लिए शहर स्थित सिविल अस्पताल के डाक्टरों को जिम्मेदार मान रही है। पुलिस का कहना है कि डाक्टरों को मालूम है कि हादसे के केस में पुलिस कार्रवाई के बाद ही शव वारिसों को सौंपा जाता है, फिर डाक्टरों ने महिला का शव कैसे परिजनों को सौंप दिया? अब जब पुलिस ने नियमों की बात की, तो पुलिस को महिला के परिजनों की नाराजगी झेलनी पड़ी।