संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। दीपावली और छठ पूजा के लिए बिहार और उप्र जाने वाली ट्रेनों में लगातार भीड़ बढ़ती जा रही है। हालात ऐसे हो गए हैं कि स्लीपर कोच में साधारण टिकट वाले यात्रियों का कब्जा है। कंफर्म टिकट यात्री ट्रेन में सवार होने के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं।
ऐसे हालात मंगलवार को अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म तीन पर आई ट्रेन नंबर 15708 आम्रपाली एक्सप्रेस में देखने को मिले। जहां ट्रेन में एसी कोच की संख्या अधिक थी, वहीं जनरल यात्रियों के लिए सिर्फ दो ही कोच लगे थे और वो भी एक आगे और एक पीछे। जनरल कोच का आलम यह था कि लोग दरवाजे पर ही लटके थे और कोच में चढ़ने के लिए धक्का-मुक्की और गालीगलौज कर रहे थे।
इससे बुरे हालात उन कोच के थे जोकि रेलवे ने आरक्षित श्रेणी के घोषित किए हुए हैं। इनमें से कुछ के दरवाजे बंद थे तो कुछ में इतनी भीड़ थी कि लोग चीख-चिल्ला रहे थे, लेकिन उनकी सूध लेने वाला कोई नहीं था। हैरानी की बात यह थी कि ट्रेन पूरी तरह से पैक थी, बावजूद इसके कुछ टीटीई जनरल कोच के नजदीक खड़े होकर ट्रेन की टिकटें बनाने में व्यस्त थे।
22 कोच की ट्रेन में एसी के 13 कोच
अमृतसर से कटिहार के बीच चलने वाली आम्रपाली एक्सप्रेस में पहले 8 जनरल कोच लगे होते थे। इसमें चार आगे व चार पीछे। बिहार व यूपी जाने के लिए प्रवासियों की यह सबसे पसंदीदा ट्रेन है। इसलिए ट्रेन में साल के 12 महीने भीड़ रहती है। लेकिन इस बार रेलवे ने ट्रेन में सिर्फ 2 ही जनरल कोच रहने दिए हैं और इनकी जगह एसी कोच की संख्या में वृद्धि कर दी है। अब ट्रेन में एसी के 13 कोच हैं। इसमें प्रथम श्रेणी के 2, तृतीय इकोनॉमी कोच 2, 4 द्वितीय श्रेणी और पांच तृतीय एसी श्रेणी के कोच लगे हुए हैं। वहीं स्लीपर श्रेणी के कोच चार हैं। इसके अलावा पार्सल वैन व एक अन्य कोच लगा हुआ है।
यह ट्रेन फिरोजपुर मंडल से संबंधित है। ट्रेन में जनरल कोच को हटाकर एसी कोच लगाने का फैसला रेलवे की ओर से किया जाता है। इसके लिए छ माह का आंकलन होता है। यात्रियों की संख्या और वेटिंग के आंकड़ा देखकर ही कोच को कम व ज्यादा करने का फैसला किया जाता है। - नवीन कुमार, वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक, अंबाला मंडल।