अंबाला सिटी। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एचडीएफसी अर्गो जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को सेवा में कमी और लापरवाही के लिए शिकायतकर्ता को 5 हजार रुपये मुआवजा और मुकदमे का खर्च तीन हजार रुपये देने का आदेश दिया है। 45 दिन में भुगतान न करने पर 6 प्रतिशत वार्षिक की दर से भुगतान करना होगा। आयोग ने यह आदेश कडियाला पानी कुमार द्वारा दायर एक उपभोक्ता की शिकायत पर दिया है।
हैदराबाद निवासी कडियाला पानी कुमार वर्तमान में एमएम मेडिकल कॉलेज मुलाना में कार्यरत हैं। उन्हें 6 मई 2024 को चक्कर आने के बाद एमएम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च में भर्ती कराया गया था। इसके बाद 9 मई 2024 को उनका पेसमेकर प्रत्यारोपण किया गया। शिकायतकर्ता के पास एचडीएफसी अर्गो की मेडिकल क्लेम पॉलिसी थी, जो 18 दिसंबर 2023 को जारी की गई थी। उन्होंने अस्पताल में भर्ती होने के खर्च 2,56,182 रुपये के लिए दावा प्रस्तुत करने पर बीमा कंपनी ने 11 मई 2024 को इस आधार पर दावा मनमाने ढंग से अस्वीकार कर दिया कि यह बीमारी पहले से मौजूद हो सकती है। यह आदेश आयोग की अध्यक्ष नीना संधू, सदस्य रूबी शर्मा और विनोद कुमार शर्मा की पीठ द्वारा पारित किया गया।
मुकदमा दायर होते ही कर दिया था भुगतान
दावा अस्वीकार होने के बाद शिकायतकर्ता ने बीमा कंपनी को कानूनी नोटिस दिया। जब कोई समाधान नहीं हुआ तो उन्होंने जुलाई 2024 को जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज की। उन्होंने इलाज के खर्च 2,56,182 रुपये, मानसिक उत्पीड़न के लिए 2,00,000 रुपये और मुकदमे के खर्च 11,000 रुपये की मांग की थी। जवाब में बीमा कंपनी ने तर्क दिया कि शिकायतकर्ता द्वारा आवश्यक दस्तावेज, विशेष रूप से पेसमेकर इतिहास, जमा न करने के कारण शुरुआत में कैशलेस अनुरोध अस्वीकार कर दिया गया था। बीमा कंपनी ने आयोग को सूचित किया कि शिकायतकर्ता द्वारा आवश्यक दस्तावेज जुलाई 2024 में जमा करने के बाद उन्होंने 27 जुलाई 2024 को 2,57,772 रुपये की दावा राशि का भुगतान कर दिया है। उनका कहना था कि राशि का भुगतान होने के कारण अब शिकायतकर्ता की कोई शिकायत शेष नहीं है, और मामले को खारिज कर दिया जाना चाहिए। इसके बाद शिकायतकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि बीमा कंपनी ने शिकायत दर्ज होने के बाद राशि का भुगतान किया। उन्होंने कहा कि समय पर भुगतान होता तो अनावश्यक मुकदमा दायर न करना पड़ता।