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Ambala News: 71 होटल और ढाबों में से 29 के पास ही एनओसी

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अंबाला छावनी का कच्चा बाजार। संवाद
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अंबाला। अंबाला सिटी और अंबाला कैंट के रिहाइशी इलाकों और बाजारों में धड़ल्ले से चल रहे होटल, ढाबे और कोचिंग संस्थान बिना किसी पुख्ता सुरक्षा इंतजाम के चल रहे हैं। वीरवार को अमर उजाला की पड़ताल में सामने आया है कि कैंट क्षेत्र में करीब 71 होटल और ढाबे संचालित हैं, जिनमें से 29 के पास ही दमकल विभाग का अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) है। शेष 42 संस्थान बिना एनओसी के चल रहे हैं।
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हालांकि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, क्षेत्र में छोटे-बड़े होटलों की कुल संख्या 54 है, लेकिन इनमें से भी सिर्फ 20 के पास ही वैध एनओसी है। सबसे बदतर स्थिति पुराने भवनों की है, जहां न तो फायर फाइटिंग सिस्टम लगे हैं और न ही आपातकालीन निकासी की कोई व्यवस्था है। संवाद
नियम न मानने पर होगी कार्रवाई
फायर एनओसी के नियम हरियाणा फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज एक्ट और नेशनल बिल्डिंग कोड के दिशा-निर्देशों के तहत तय किए गए हैं। कोई व्यावसायिक या रिहाइशी इमारत इन नियमों को पूरा नहीं करती, तो विभाग को उसे सील करने और भारी जुर्माना लगाने का अधिकार है।
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केस-1 : पड़ताल में पाया गया कि कई होटल और कोचिंग सेंटर में भी आने जाने का एक ही रास्ता है। अंबाला कैंट के कालीबाड़ी चौक स्थित कोचिंग संस्थान में दर्जनों बच्चे पढ़ने आते हैं, यहां पर अंदर जाने का एक ही रास्ता है। इसके साथ ही निकल्सन रोड पर तीन से चार होटल हैं। अधिकांश में आने जाने का एक ही रास्ता है। हालांकि, होटलों ने फायर एनओसी ले रखी है। अब एक ही रास्ते पर फायर एनओसी कैसे मिल गई इस पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
तंग गलियाें में गाड़ियों के घुसने का रास्ता नहीं
केस-2: कैंट का सदर बाजार और सिटी का प्रसिद्ध कपड़ा मार्केट में सबसे अधिक खतरा है। सिटी की कपड़ा मार्केट और मनियारी मार्केट में कई बार आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं। यहां पर आग बुझाने के लिए अग्निशमन विभाग को जद्दोजहद करनी पड़ी। अंबाला कैंट में सौदागर बाजार की गली में अग्निशमन विभाग की गाड़ी आधे ही रास्ते जा सकती है। इसके बाद गाड़ी वहीं रुक जाएगी। सिर्फ चार फीट चौड़ा रास्ता है। यहां के दुकानदारों के पास अग्निशमन यंत्र भी नहीं हैं। इसी प्रकार कच्चा बाजार में भी सड़कें सकरी हैं और दुकानों के आगे तिरपाल लगी हुई है। यहां पर आग लगने की घटना होने पर संभालना मुश्किल हो जाएगा।
इन्हें लेनी होगी फायर एनओसी
-हर वो आवासीय या गैर-आवासीय भवन जिसकी ऊंचाई 15 मीटर से अधिक है, उसके लिए फायर एनओसी लेना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
-500 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले सभी कमर्शियल, इंडस्ट्रियल और वेयरहाउस (गोदाम) भवन, सभी होटल, रेस्टोरेंट, अस्पताल, क्लीनिक, मॉल, स्कूल, कॉलेज, कोचिंग सेंटर और बैंकॉक हॉल, चाहे उनका आकार कुछ भी हो वह भी इस दायरे में आते हैं।
- व्यापारिक और व्यावसायिक गतिविधियों वाले भवनों के लिए फायर एनओसी केवल 3 वर्ष के लिए वैध होती है।
-16.5 मीटर से अधिक ऊंची रिहाइशी सोसायटियों और बहुमंजिला फ्लैटों के लिए यह वैधता 5 वर्ष की होती है।
-एनओसी की अवधि खत्म होने से कम से कम 2 महीने पहले दोबारा रिन्यू करने के लिए आवेदन करना जरूरी होता है।
जरूरी सुरक्षा उपकरण और बुनियादी ढांचा
-कोचिंग सेंटर या होटलों में आने-जाने और आपातकालीन निकास के लिए चौड़े रास्ते और सीढ़ियां होनी चाहिए।
-बिल्डिंग के भीतर आग बुझाने वाले सिलेंडर, स्प्रिंकलर सिस्टम, फायर अलार्म, स्मोक डिटेक्टर और फायर हाइड्रेंट का वर्किंग कंडीशन में होना अनिवार्य है।
-आग बुझाने के उपकरणों के लिए बिल्डिंग में एक समर्पित वाटर टैंक होना जरूरी है।
- मुख्य मार्ग से बिल्डिंग के चारों तरफ इतना खुला स्पेस होना चाहिए ताकि फायर ब्रिगेड की बड़ी गाड़ी आसानी से घूम सके।
एनओसी के लिए जरूरी दस्तावेज
- आर्किटेक्ट द्वारा अप्रूव्ड बिल्डिंग का साइट प्लान और लेआउट।
- सीएलयू सर्टिफिकेट।
-बिल्डिंग कंप्लीशन सर्टिफिकेट और स्ट्रक्चरल सेफ्टी सर्टिफिकेट।
- लगाए गए फायर उपकरणों की सूची और उनकी तस्वीरें/वर्किंग वीडियो।
वर्जन
जिन लोगों के पास एनओसी नहीं है या जिनकी एनओसी एक्सपायर हो गई है उन्हें नोटिस दिए जा चुके हैं। इनकी पालना न करने पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इस संबंध में मुख्यालय को भी सूचित कर दिया गया।
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—पंकज कुमार, फायर सेफ्टी अफसर, अंबाला कैंट

अंबाला छावनी का कच्चा बाजार। संवाद

अंबाला छावनी का कच्चा बाजार। संवाद

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