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Ambala News: नर्सिंग ऑफिसरों की दो घंटे की हड़ताल से ओपीडी सेवाएं चरमराईं

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- पर्ची काउंटर से लेकर डॉक्टरों के कमरों के बाहर मरीजों की लगी लंबी कतार
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- 350 नर्सिंग ऑफिसर हैं जिले में।

संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। हरियाणा राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रेनू भाटिया के खिलाफ जिलेभर में करीब 350 नर्सिंग ऑफिसर्स का गुस्सा फूट पड़ा। दो घंटे की पेन डाउन हड़ताल के दौरान ओपीडी व वार्ड की सेवाएं प्रभावित रहीं। सुबह 10 बजे ही नर्सिंग ऑफिसर्स ने एकजुट होकर रोष जताया। कैंट नागरिक अस्पताल की इमरजेंसी के बाहर जमीन पर बैठकर अध्यक्ष रेनू भाटिया के खिलाफ नारे लगाए। दो घंटे की सांकेतिक हड़ताल के कारण अस्पताल की ओपीडी सेवाएं पूरी तरह चरमरा गईं। पर्ची काउंटर से लेकर डॉक्टरों के कमरों के बाहर मरीजों की लंबी लाइनें लग गईं। हालांकि, महिला ओपीडी में नर्सिंग ऑफिसर्स ने मरीजों की परेशानी को देखते हुए एक घंटे पहले ही जांच शुरू कर दी थी जबकि ओपीडी और दवा काउंटरों पर प्रेक्टिस कर रहे छात्रों ने मोर्चा संभाला।


मांगें नहीं मानी तो तेज होगा आंदोलन
नर्सिंग ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसिएशन की प्रदेश अध्यक्ष विनीता कुमारी ने कहा कि जल्द महिला आयोग की अध्यक्ष ने अपने व्यवहार के लिए सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगी तो आंदोलन को तेज किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि नर्सिंग ऑफिसर्स की ड्यूटी मुख्य रूप से वार्डों में होती है जबकि ओपीडी में फीमेल हेल्पर की तैनाती रहती है। नियमानुसार, यदि किसी डॉक्टर को जरूरत होती है तो वह महिला हेल्पर को बुलाता है, जो कि निर्धारित प्रक्रिया का हिस्सा है। नर्सिंग स्टाफ डॉक्टरों का पहरेदार नहीं होता है। कुरुक्षेत्र के नागरिक अस्पताल में 7 जून को महिला आयोग की अध्यक्षा रेनू भाटिया एक डॉक्टर से जुड़े दुष्कर्म केस की जांच करने पहुंची थीं।
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मरीजों की पीड़ा-

अधिकारियों की आपसी लड़ाई में हमारा क्या कसूर
मैं सुबह 8 बजे अपने पति व बच्चे को लेकर उपचार के लिए आई थी। डॉक्टर को दिखाने के लिए ओपीडी में आई तो लाइनें लगी हुई थी। पता चला कि नर्सिंग ऑफिसर की पेन डाउन हड़ताल चल रही है। एक घंटे तक इंतजार करना पड़ा, तब जाकर नंबर आया। अधिकारियों की आपसी लड़ाई में मरीजों का क्या कसूर है।
- पूजा, शहजादपुर

वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए
आठ माह की गर्भवती हूं। जांच के लिए ओपीडी में आई तो मरीजों की लाइन लगी हुई थी। पहले कार्ड लेने में देरी हुई और फिर ओपीडी में आकर हड़ताल के कारण इंतजार करना पड़ा। गनीमत रही कि एक घंटे बाद ही नर्सिंग ऑफिसर ने आकर जांच शुरू कर दी और समय रहते उपचार मिला। अधिकारियों की जिम्मेदारी बनती है कि वैकल्पिक व्यवस्था करनी चाहिए।
- परमजीत, तसम्बली

करना पड़ा इंतजार
तबीयत ठीक न होने के कारण पहले ही एक घंटे के बाद कार्ड बनवाकर ओपीडी तक पहुंची। बीपी की जांच के लिए नर्सिंग स्टाफ न होने के कारण एक घंटे इंतजार करना पड़ा। स्थिति यह बन गई थी कि खड़े-खड़े चक्कर आ रहे थे। बैठने वाली कुर्सियां भी मरीजों से भरी हुई थी।
शीनू, मुनहेड़ी गांव


नर्सिंग ऑफिसर्स बोलीं-


ऐसा अपमान बर्दाश्त नहीं
महिला आयोग की अध्यक्ष का काम महिलाओं और समाज को सुरक्षा व सम्मान देना है, न कि ड्यूटी पर तैनात नर्सिंग ऑफिसर्स के साथ दुर्व्यवहार करना। हम दिन-रात मरीजों की सेवा करते हैं और ऐसा अपमान बर्दाश्त नहीं करेंगे। रेनू भाटिया को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए और इस मामले में दोषी को सख्त सजा मिलनी चाहिए।
- बलवंत कौर, सीनियर नर्सिंग ऑफिसर, कैंट

बिना गलती टारगेट कर बोलना गलत
हम मरीजों को परेशान नहीं करना चाहते इसलिए हमने इमरजेंसी सेवाओं को चालू रखा लेकिन हमारे आत्मसम्मान से समझौता नहीं किया जा सकता। उच्च पदों पर बैठे लोगों को अपने पद की गरिमा और कर्मचारियों के प्रति व्यवहार का ध्यान रखना चाहिए। एक डॉक्टर की गलती के चलते सभी नर्सिंग ऑफिसर्स को टारगेट कर बोलना गलत है।
- नीलम, नर्सिंग ऑफिसर, कैंट

मरीज को अपना परिवार मानकर करतीं हैं सेवा
हम अस्पताल में आने वाले हर मरीज को अपना परिवार मानकर सेवा करते हैं। रात-रात भर जागकर ड्यूटी करने के बदले हमें सराहना नहीं तो कम से कम सम्मान तो मिलना ही चाहिए। इस पूरे प्रकरण में ऐसा प्रतीत हो रहा है कि डॉक्टर की जगह नर्सिंग ऑफिसर्स की गलती है जो सरासर गलत है।
- परमजीत, नर्सिंग ऑफिसर, कैंट

सार्वजनिक रूप से जलील करना निंदनीय
स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ नर्सिंग स्टाफ होता है। किसी और की प्रशासनिक चूक या गलती का ठीकरा हमारे सिर पर फोड़ना और सार्वजनिक रूप से जलील करना निंदनीय है। जब तक सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते हैं, तब तक विरोध जारी रहेगा।
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- गगनदीप कौर, नर्सिंग ऑफिसर्स

हमारी शराफत को कमजोरी न समझें
इमरजेंसी सेवाएं सिर्फ इसलिए चालू रखी हैं क्योंकि हमारी नैतिकता मरीजों को तड़पता हुआ देखने की इजाजत नहीं देती। प्रशासन हमारी इस शराफत को हमारी कमजोरी न समझे। अगर जल्द कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो इसका कड़ा विरोध होगा।
- शर्मिला, नर्सिंग ऑफिसर

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