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Ambala News: राजमार्ग पर 50 किमी दायरे में एक ही एंबुलेंस, 1033 पर नहीं उठा रहे फोन

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राजमार्ग पर हेल्पलाइन नंबर का लगा बोर्ड। सोशल मीडिया
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- सड़क दुर्घटना होने पर लोग डायल 112 की ले रहे मदद
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माई सिटी रिपोर्टर

अंबाला सिटी। राष्ट्रीय राजमार्गों पर अगर सड़क हादसा हो जाए तो आप एनएचएआई (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण) को फोन ही करते रह जाएंगे पर जल्दी मदद नहीं मिल सकेगी। मंगलवार को जब अमर उजाला ने अंबाला कैंट से यमुनानगर जा रहे राष्ट्रीय राजमार्ग पर मदद लेने के लिए हेल्पलाइन नंबर-1033 मिलाया तो संपर्क ही नहीं हो सका। बार-बार फोन करने पर कंप्यूटर से एक ही जवाब आया कि ग्राहक सेवा प्रतिनिधि व्यस्त हैं।
हेल्पलाइन नंबर को 30 मिनट तक लगातार फोन किया मगर कोई संपर्क नहीं हो सका। न ही कोई फोन आया। ऐसे में अंदाजा लगा सकते हैं कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर सड़क हादसा होने पर कम से कम टोल प्लाजा की तरफ से समय से मदद नहीं मिल सकेगी। इसीलिए अधिकांश हादसों में डायल 112 की मदद अधिक ली जा रही है। अंबाला के विभिन्न राजमार्गों में से प्रत्येक पर एक ही एंबुलेंस की सुविधा है, जो नियम के अनुसार 50 किलोमीटर के दायरे को कवर करती है।
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तीन टोल प्लॉजा, चार एंबुलेंस

अंबाला से अमृतसर जा रहे राष्ट्रीय राजमार्ग का घग्गर टोल प्लॉजा संचालन देखता है। यहां पर एक एंबुलेंस, एक पेट्रोलिंग वाहन और एक क्रेन उपलब्ध है। इसी प्रकार हिसार से कैथल जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर सैणी माजरा में एक एंबुलेंस व एक ही पेट्रोलिंग गाड़ी है। वहीं हाल ही में बनाए गए अंबाला कालाआंब राजमार्ग पर स्थित बनौंदी टोल पर दो एंबुलेंस, एक पेट्रोलिंग वाहन है। अंबाला में बनौंदी टोल एक मात्र टोल है जहां टोल प्लॉजा को चलाने वाली कंपनी ने एक अतिरिक्त एंबुलेंस रखी है। क्योंकि टोल प्लॉजा के नियमाें के अनुसार टोल प्रबंधन को एक एंबुलेंस और पेट्रोलिंग गाड़ियां सड़क दुर्घटनाओं या लोगों की आपात परिस्थिति में मदद के लिए रखनी अनिवार्य होती हैं। जो 50 किलोमीटर का क्षेत्र कवर करती है।
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कैशलेस इलाज होने से राहत

अब तक सड़क हादसों में घायल लोगों को एंबुलेंस की मदद से सरकारी अस्पताल में पहुंचाया जाता था। जब से सरकार ने सड़क हादसों में घायलों की जान बचाने के लिए उन्हें कैशलेस ट्रीटमेंट की सुविधा दी है तब से काफी राहत मिली है। अब पुलिस सड़क हादसे में घायल को पास के ही निजी अस्पताल में ले जा सकती है। अंबाला में इस साल अब तक 154 मामलों में लोगों को निजी अस्पतालों में उपचार मिला, जिसका भुगतान सरकार ने किया।
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