बराड़ा। करीब 36 साल पहले मिला तोहफा आज परेशानियों का बस स्टैंड बनकर रह गया है। न तो रोडवेज ने इस ओर ध्यान दिया और न ही इसका रखरखाव किया जा रहा है। यही कारण है कि लगातार जर्जर हालत में जा रहा है, जबकि बरसाती दिनों में तो बस स्टैंड के भीतर आना ही मुश्किल हो जाता है। सुविधा के नाम पर कुछ नहीं है, जबकि यात्री भी बस स्टैंड में बसों का इंतजार करने की बजाए बाहर ही इंतजार करते हैं।
बराड़ा बस स्टैंड जर्जर हालत में पहुंच चुका है, जबकि इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। रोडवेज विभाग की ओर से रखरखाव ठीक से न होने के कारण यात्रियों के लिए परेशानी बनता जा रहा है। स्थिति लगातार बिगड़ रही है, जबकि लोग भी बस स्टैंड से किनारा करने लगे हैं। बस स्टैंड में कर्मचारी मिलते नहीं, जबकि बरसात के दिनों में यह तालाब का रूप धारण कर लेता है। ऐसे में कर्मचारियों को भी बस स्टैंड के भीतर जाने में परेशानियां झेलनी पड़ती हैं। अगस्त 1990 तत्कालीन परिवहन मंत्री ने इस बस स्टैंड का उद्घाटन किया था। कमरों के दरवाजे और खिड़कियां टूट चुकी हैं, जिन्हें बदला तक नहीं गया। इस बस स्टैंड में यहां आवारा पशुओं की शरणस्थली बन चुकी है। बुकिंग काउंटर में कुत्तों का जमावड़ा है, जबकि गंदगी की भरमार है। सफाई के अभाव के कारण इस बस स्टैंड में आना ही मुश्किल दिखता है। आवारा जानवर इस बस स्टैंड में घूमते रहते हैं। बसें भी इक्का दुक्का ही भीतर आती है, जिसके कारण जो भी यात्री बस स्टैंड के भीतर हैं, उनको इन आवारा जानवरों से हमेशा खतरा बना रहता है।
बस स्टैंड की हालत खस्ता हो चुकी है और भीतर खड़े हो कर बस का इंतजार करने का मतलब है कि बसों को आते-जाते देखना। बसें ही भीतर नहीं आती, जिसके कारण बस स्टैंड के बाहर ही इंतजार करना पड़ता है। सालों से इस बस स्टैंड की यही हालत है।
- दिनेश कुमार, यात्री
बराड़ा बस स्टैंड तो रामभरोसे ही चल रहा है। अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं देते और जो कर्मचारी यहां पर तैनात है, वे सुनते नहीं। अब क्या करें, सरकार ने बस स्टैंड तो दे दिया, लेकिन इसका रखरखाव जिस विभाग के जिम्मे है, वह ही इस ओर से आंखे मूंदे बैठा है।
- राजकुमार, यात्री
हर बार नेता लोग बस स्टैंड की कायाकल्प का दावा करते हैं, लेकिन इस ओर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता। लगातार बस स्टैंड की हालत बद से बदतर होती जा रही है, जबकि इस बस स्टैंड का फायदा स्थानीय जनता को पूरी तरह से नहीं मिल पा रहा है।