संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। छावनी के रामबाग गोशाला में दिव्या श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन इस श्राद्ध पक्ष में गुप्ता परिवार की ओर से आयोजित किया जा रहा है। मंगलवार को कथा के द्वितीय दिवस कथा में सतगुरु देव देशमुख वशिष्ठ महाराज ने बताया, भगवान की भक्ति कैसे होती है, हमें सांसारिक गतिविधि के कार्यों से समय निकाल कर भगवान की भक्ति में समय देना चाहिए।
इच्छामृत्यु का मिला वरदान
भीष्म पितामह की कहानी उनके जन्म से शुरू होती है, जब राजा शांतनु और देवी गंगा ने उन्हें देवव्रत नाम दिया था। अपने पिता के सत्यवती से विवाह करने में मदद के लिए, देवव्रत ने आजीवन ब्रह्मचारी और अविवाहित रहने की भीषण प्रतिज्ञा ली, इसके बाद उनका नाम भीष्म पड़ा और उन्हें इच्छामृत्यु का वरदान मिला। महाभारत युद्ध में, शिखंडी को ढाल बनाकर अर्जुन ने भीष्म पर बाण चलाए और इच्छामृत्यु के वरदान के कारण वह बाणों की शैया पर 58 दिनों तक लेटे रहे, जब तक कि सूर्य उत्तरायण नहीं हुआ। तब उन्होंने शरीर त्यागा। तृतीय दिवस की कथा में भक्तों ने भक्ति का रसपान किया।
अंबाला छावनी के रामबाग गौशाला में प्रवचन करते कथा व्यास। प्रवक्ता
अंबाला छावनी के रामबाग गौशाला में प्रवचन करते कथा व्यास। प्रवक्ता
अंबाला छावनी के रामबाग गौशाला में प्रवचन करते कथा व्यास। प्रवक्ता