कोरोना की दूसरी लहर के बाद अब तीसरी लहर की आशंका जताई जा रही है। साथ ही बच्चों पर सबसे अधिक खतरा जताया जा रहा है, लेकिन जिले में अपेक्षाकृत संसाधन और तैयारियों का अभाव है। स्थिति यह है कि जिले में 13 साल तक के कुल तीन लाख 75 हजार बच्चों पर मात्र पांच बालरोग विशेषज्ञों की तैनाती है, यानी 75 हजार बच्चों पर एक बालरोग विशेषज्ञ मौजूद हैं। यही नहीं जिले के तीन सरकारी अस्पतालों में से किसी में भी बाल चिकित्सा गहन देखभाल यूनिट की व्यवस्था नहीं है।
अंबाला के जिला नागरिक अस्पताल में एक, नारायणगढ़ नागरिक अस्पताल में भी एक और छावनी नागरिक अस्पताल में फिलहाल तीन बालरोग विशेषज्ञ तैनात हैं। जिला नागरिक और नारायणगढ़ अस्पताल में निक्कू यूनिट स्थापित है, वहीं छावनी में स्पेशल न्यूबार्न केयर यूनिट स्थापित है, जहां बालरोग विशेषज्ञों की तैनात जरूरी है। इसके अलावा जिले में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर बालरोग विशेषज्ञों का अभाव है। यह स्थिति तब है जबकि सरकार ने सभी सीएचसी में बच्चों के लिए अलग से वार्ड और एंबुलेंस तैनात करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन अभी धरातल पर यह नजर नहीं आ रहा है। अलबत्ता जिला नागरिक अस्पताल में 100 बेड का नया भवन बनाया जा रहा है। इसमें बाल चिकित्सा गहन यूनिट स्थापित किया जाएगा, लेकिन अभी इसमें कम से कम एक साल लगना तय है।
मुलाना अस्पताल हो सकता है मददगार
मुलाना मेडिकल कालेज एवं अस्पताल में बच्चों के लिए निक्कू एवं पिकू दोनों यूनिट स्थापित हैं। यहां पर करीब 12 बाल एवं शिशु रोग विशेषज्ञ मौजूद हैं। ऐसे में तीसरी लहर में एकबार फिर यह मददगार साबित हो सकता है।
सभी डाक्टरों को दिलाएंगे बच्चों से जुड़ी जरूरी ट्रेनिंग
अभी हमारे पास पांच बाल रोग विशेषज्ञ हैं। इसके अलावा हमारी बात इंडियन आर्गेनाइजेशन पेडियोट्रिक एसोशिएशन से हुई है, जो सभी डाक्टरों को बच्चों से जुड़ी जरूरी ट्रेनिंग देगी, ताकि आपदा आने पर सभी डॉक्टर बच्चों का इलाज कर सकें। वहीं जिला नागरिक अस्पताल में जल्द से जल्द बाल चिकित्सा गहन यूनिट स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।----डॉ. कुलदीप सिंह, सिविल सर्जन अंबाला