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कालोनियों के बीच तेल और गैस गोदामों से खतरा

Mon, 14 Sep 2015 12:37 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/अंबाला
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यदि जल्द ही कोई व्यवस्था नहीं की गई तो अंबाला कैंट में भी लोगों की जिंदगी दांव पर लग सकती है। कैंट के रिहायशी इलाकों में बने गैस सिलेंडरों के गोदाम कभी भी इन लोगों पर भारी पड़ सकते हैं। इसके साथ ही इंडियन ऑयल कार्पोरेशन (आईओसी) के तेल डिपो से भी कैंट की बड़ी आबादी को खतरा है। अभी तक नगर निगम के पास ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है कि इन गैस सिलेंडरों के गोदामों को आबादी से बाहर किया जा सके। 
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यह है स्थिति अंबाला कैंट के रिहायशी इलाकों में गैस सिलेंडरों के गोदाम हैं। इन गोदामों के आसपास अच्छी खासी आबादी है, जो हर समय बारूद के ढेर पर है। यह हल्की सी लापरवाही इस आबादी के बड़ा खतरा बन सकती है। बीडी फ्लोर मिल के साथ, भारत माता मंदिर गेट वाली रोड, बब्याल चौक पर यह गैस गोदाम हैं। इन गैस गोदामों के आसपास काफी घनी आबादी है। इन गोदामों में भरे हुए हजारों सिलेंडर हर समय उपलब्ध रहते हैं और यहीं पर गाड़ियां भी इन सिलेंडरों को अनलोड करती हैं। 
आईओसी से भी है बड़ा खतरा अंबाला कैंट में आईओसी डिपो से भी आबादी को बड़ा खतरा है। इसी से उत्तर भारत के कई राज्यों को पेट्रोल और डीजल आदि सप्लाई किया जाता है। आईओसी के आसपास भी काफी आबादी है, जिससे इनको खतरा है। इसको यहां से शिफ्ट करने की भी मांग की जा चुकी है। उल्लेखनीय है कि कैंट के बारह क्रास रोड पर भारत पेट्रोलियम का टर्मिनल से भी खतरा था। इसी को शिफ्ट करने की मांग उठी, जिसके बाद इसे शिफ्ट कर दिया गया।
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ऐसे बढ़ता गया खतरा यह खतरा धीरे-धीरे बढ़ता गया, लेकिन इस ओर प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया। इन गोदामों के आसपास धीरे-धीरे आबादी बढ़ती गई और यह गोदाम आबादी के बीच आ गए। लेकिन इन गोदामों से बढने वाले खतरे को लेकर प्रशासन पूरी तरह से मौन रहा। अब इन गोदामों के आसपास खतरा काफी बढ़ गया है ।
यह कहते हैं लेाग इन गोदामों के आसपास रहने वालों में अजय कुमार, अमरिंदर, पंकज वोहरा, सुदेश वालिया, रमन कुमार, बलजिंदर सिंह, गौरव, रिशभ का कहना है कि जिनके घर इन गोदामों के साथ लगते हैं, उनको को तो गैस की स्मैल तक आती है। इसके अलावा खतरा काफी अधिक है, लेकिन इस बारे में कोई कुछ नहीं करता। यदि बारह क्रास रोड से तेल टर्मिनल शिफ्ट हो सकता है, तो यह गैस गोदाम भी आबादी से दूर ले जाए जा सकते हैं ।

गैस गोदाम पहले आबादी से बाहर थे, लेकिन कालोनियां बसने के बाद यह आबादी के बीच आ गए हैं। खतरा तो है, लेकिन इस बारे में अभी कोई योजना नहीं है। इस बारे में हाउस मीटिंग में चर्चा के बाद ही कुछ किया जा सकता है। -रमेश मल, मेयर, नगर निगम, अंबाला।
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