कुरुक्षेत्र। डिजिटल युग में डाटा सुरक्षित रखना सबसे बड़ी चुनौती है। खासकर पेन ड्राइव और एसडी कार्ड जैसे पोर्टेबल स्टोरेज डिवाइस के माध्यम से जानकारी के आदान-प्रदान के दौरान डाटा चोरी और दुरुपयोग का खतरा बढ़ जाता है। इसी समस्या के समाधान के लिए राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) कुरुक्षेत्र के शोधकर्ताओं ने एक नई तकनीक विकसित की है, जिसे उन्होंने फर्मवेयर-विशिष्ट कस्टमाइज्ड फाइल सिस्टम का नाम दिया है।
इस तकनीक को एनआईटी कुरुक्षेत्र के प्रोफेसर जितेंद्र कुमार छाबड़ा के नेतृत्व में गौरव कुमार घिल्डियाल, अपूर्व जोशी, मयंक केडिया और दिनेश कुमार ने विकसित किया है। इसका उद्देश्य डाटा को इस तरह सुरक्षित करना है कि वह केवल उन्हीं खास डिवाइस पर ही पढ़ा जा सके, जिन पर उसे संग्रहित किया गया है। प्रो. जितेंद्र ने बताया कि यह तकनीक सरकारी संस्थानों, रक्षा क्षेत्र, शोध संस्थानों और कॉरपोरेट सेक्टर के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है, जहां संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा सर्वोपरि होती है। इस नए फाइल सिस्टम को भविष्य में डाटा सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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फाइल सिस्टम में दो फ्लैश डिवाइस
प्रोफेसर जितेंद्र कुमार ने बताया कि इस फाइल सिस्टम की सबसे खास बात यह है कि इसमें एक नहीं बल्कि दो फ्लैश डिवाइस है। जैसे एक पेन ड्राइव और एक एसडी कार्ड का उपयोग किया जाता है। डाटा को इन दोनों डिवाइस में विभाजित कर सुरक्षित किया जाता है। यदि इनमें से कोई एक डिवाइस खो भी जाए, तो डाटा को पढ़ना या समझना संभव नहीं होगा। यह फाइल सिस्टम किसी भी मौजूदा फाइल सिस्टम फाइल एलोकेशनएफएटी, न्यू टेक्नोलॉजी फाइल सिस्टम (एनटीएफएस) या एक्सटेंडेड फाइल एलोकेशन टेबल (ईएक्सएफएटी) के ऊपर काम करता है। इसमें एक विशेष मेटाफाइल बनाई जाती है, जिसमें फाइलों और फोल्डरों की पूरी जानकारी सुरक्षित रहती है। यह मेटाफाइल सामान्य उपयोगकर्ता को दिखाई नहीं देती और केवल इसी विशेष फाइल सिस्टम से पढ़ी जा सकती है।
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गोपनीयता के आधार पर अलग-अलग फाइलों में रखा जाता है डाटा
प्रोफेसर जितेंद्र ने बताया कि डाटा को गोपनीयता के आधार पर फाइलों को अलग-अलग तरीके से संभाला जाता है। छोटी फाइलें सीधे मेटाफाइल में सुरक्षित होती हैं, जिससे उन्हें तेजी से एक्सेस किया जा सके। बड़ी फाइलें अलग डाटा क्षेत्र में रखी जाती हैं। यदि कोई फाइल अत्यधिक गोपनीय है, तो उसे डिवाइस के फर्मवेयर से बने विशेष एन्क्रिप्शन की मदद से सुरक्षित किया जाता है।
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सही पासवर्ड और फाइल सिस्टम के बिना नहीं दिखाई देगा डाटा
इस प्रणाली में पेन ड्राइव का वीआईडी-पीआईडी और एसडी कार्ड का सीआईडी जैसे फर्मवेयर पहचान संकेतक एन्क्रिप्शन कुंजी बनाने के लिए उपयोग किए जाते हैं। इसका लाभ है कि यदि कोई व्यक्ति पूरा डाटा कॉपी भी कर ले, तो भी दूसरे डिवाइस पर वह डाटा बेकार साबित होगा। फाइल सिस्टम को एक्सेस करने के लिए उपयोगकर्ता को पासवर्ड डालना होगा, जिसे सुरक्षित रूप से एसएचए-256 तकनीक से हैश कर संग्रहित किया जा सकेगा। सही पासवर्ड और फाइल सिस्टम के बिना सिस्टम खुल ही नहीं सकता।
कुरुक्षेत्र। प्रोफेसर जितेंद्र कुमार छाबड़ा।