अंबाला छावनी के गोबिंद नगर स्थित श्री बांके बिहारी मंदिर में प्रवचन करते शशांक भारद्वाज। प्रवक
अंबाला। श्री बांके बिहारी मंदिर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन श्रद्धालुओं की काफी भीड़ रही। नैनीताल से आए कथावाचक शशांक महाराज ने गोवर्धन पूजा और छप्पन भोग के प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि अहंकार नहीं, विश्वास ही प्रभु प्राप्ति का मार्ग है। उन्होंने बताया कि भगवान श्री कृष्ण ने मात्र सात वर्ष की आयु में सात दिनों तक गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की थी।
महाराज ने कहा कि जीवन में विश्वास का बहुत महत्व है। जैसे हम ड्राइवर पर भरोसा कर बस या ट्रेन में बैठते हैं, वैसे ही ईश्वर पर अडिग विश्वास ही जीव का कल्याण करता है। प्रहलाद का विश्वास ही था, जिसने नरसिंह भगवान को प्रकट किया। उन्होंने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि असफलता से घबराना नहीं चाहिए, यदि एक द्वार बंद होता है, तो ईश्वर उससे भी बड़ा द्वार खोल देता है।
कथा के दौरान महाराज ने रासलीला के आध्यात्मिक अर्थ को स्पष्ट करते हुए कहा कि गोपी कोई शरीर नहीं, बल्कि एक भाव है और रास आत्म-साक्षात्कार का नाम है। इस दौरान दया और करुणा के प्रसंग सुनाते हुए महाराज की आंखें भर आईं। प्रधान दिनेश बहल ने बताया कि मुख्य यजमान की भूमिका रितु गुप्ता व आशीष गुप्ता ने निभाई। इस अवसर पर सूचना आयुक्त नीता खेड़ा, प्रदीप खेड़ा, सतीश चंद्र दुआ, संजय गौरी और पुनीत वर्मा सहित काफी संख्या में भक्तगण उपस्थित रहे। अंत में श्रद्धालुओं को छप्पन भोग का प्रसाद वितरित किया गया।
अंबाला छावनी के गोबिंद नगर स्थित श्री बांके बिहारी मंदिर में प्रवचन करते शशांक भारद्वाज। प्रवक