अंबाला सिटी। पराली प्रबंधन को लेकर जहां सरकार ने इस बार सख्ती बढ़ा दी है, वहीं किसानों में भी पिछले वर्षों के मुकाबले जागरूकता आई है। प्रदेश के सभी 22 जिलों की बात करें तो आठ जिले ऐसे हैं, जहां अभी तक पराली जलाने का एक भी मामला सामने नहीं आया है। इनमें अंबाला, चरखी-दादरी, गुरुग्राम, महेंद्रगढ़, नूंह, पंचकूला, रेवाड़ी और रोहतक शामिल हैं जबकि 13 जिले ऐसे हैं, जहां पर पराली जलाने के मामले बढ़ रहे हैं। इनमें अब तक कुल 54 मामले सामने आ चुके हैं।
जींद जिले में सबसे ज्यादा 15 मामले और फतेहाबाद 7 मामलों के साथ दूसरे नंबर पर है। इसके अलावा भिवानी में 2, फरीदाबाद में 3, हिसार में 4, कैथल में 4, करनाल में 3, कुरुक्षेत्र में 1, पलवल में 1, यमुनानगर में 3, पानीपत में 2, सिरसा में 5 और सोनीपत में 4 मामले पराली जलाने के आ चुके हैं।
पिछले वर्षों के मुकाबले आई भारी कमी
पराली जलाने को लेकर पिछले वर्ष कृषि विभाग ने काफी मशक्कत की थी। कई जगह तो कृषि विभाग अधिकारियों और किसानों के बीच कहासुनी के मामले भी सामने आए थे। इस बार पराली जलाने के मामले में भारी कमी आई है। वहीं, सरकार की सख्ती के कारण और किसानों में जागरूकता आना भी यह अहम वजह है। पराली जलाने पर कानूनी कार्रवाई के साथ ही मेरी फसल मेरा पोर्टल पर रेड एंट्री की कार्रवाई विभाग की ओर से जाती है, जिससे किसान पोर्टल के जरिए अपनी फसल नहीं बेच पाएंगे। इसके साथ ही पहले के मुकाबले सुपर सीडर और अन्य उपकरण भी बढ़े हैं।
अभी तक प्रदेश में पराली जलाने के मामले
जिला 2021-2022-2023-2024-2025
अंबाला 66 54 93 74 0
भिवानी 0 0 2 0 2
चरखी-दादरी 0 0 0 0 0
फरीदाबाद 1 1 2 33 3
फतेहाबाद 93 83 106 40 7
गुरुग्राम 0 0 0 0 0
हिसार 4 15 43 19 4
झज्जर 0 0 4 3 1
जींद 59 81 93 49 15
कैथल 420 250 88 129 4
करनाल 494 140 48 71 3
कुरुक्षेत्र 250 183 76 93 1
महेंद्रगढ़ 0 0 0 0 0
नूंह 0 0 0 0 0
पलवल 25 5 37 26 4
पंचकूला 0 0 1 14 0
पानीपत 19 15 16 28 2
रेवाड़ी 0 0 0 0 0
रोहतक 0 0 5 6 0
सिरसा 16 14 8 16 5
सोनीपत 7 7 46 40 4
यमुनानगर 54 45 46 24 3
कुल 1508 893 714 665 58
नोट : आंकड़े 15 सितंबर से 22 अक्तूबर तक के हैं।
- जिले में अभी तक पराली जलाने का एक भी मामला सामने नहीं आया है। पराली प्रबंधन को लेकर सरकार भी सख्त है और किसानों भी जागरूक है।
- डॉ. जसविंद्र सैनी, उप निदेशक, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग।