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Ambala News: न बैठने को बैंच, न पर्याप्त कमरे, दरी पर भविष्य गढ़ने को मजबूर नौनिहाल

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अंबाला छावनी के मिडिल स्कूल में फर्श पर बैठकर पढ़ाई करते बच्चे। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
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अंबाला। छावनी क्षेत्र के दलीपगढ़ और घसीटपुर स्थित सरकारी माध्यमिक विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं के अभाव के कारण 150 से अधिक विद्यार्थियों का भविष्य बदहाली के साये में सिमट कर रह गया है। कहीं कमरे न होने के कारण बच्चे बरामदे में फर्श पर बैठकर पढ़ने को विवश हैं, तो कहीं 50 से अधिक बच्चों के पास बैठने के लिए बेंच तक नहीं हैं।
जिला में कुल 762 सरकारी हैं, जिसमें से पहली से पांचवीं तक 497 स्कूल हैं, प्राइमरी स्कूल में 1400 के करीब शिक्षकों के पद हैं, 850 शिक्षक कार्यरत हैं और 550 शिक्षकों के पद खाली हैं। इसमें सबसे ज्यादा शिक्षकों की कमी प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालयों में है। अंबाला में सेक्टर आठ, सेक्टर नौ, सेक्टर दस, जंडली स्थित प्राइमरी और मिडिल स्कूल, घसीटपुर मिडिल स्कूल, दलीपगढ़ प्राइमरी स्कूल सहित अन्य स्कूलों में शिक्षकों की कमी है। इसके अलावा कई शिक्षकों की ड्यूटी एसआईआर में लगी हुई है।
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71 छात्रों पर केवल दो शिक्षक, छठी-सातवीं के बच्चे दरी पर
राजकीय माध्यमिक विद्यालय दलीपगढ़ में कुल 71 विद्यार्थी हैं। कहने को तो यहां मुख्याध्यापक समेत पांच शिक्षकों की तैनाती है, लेकिन मई माह से दो शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक एसआईआर ड्यूटी में भेज दिया गया है। ऐसे में तीन कक्षाओं को संभालने का पूरा जिम्मा केवल दो शिक्षकों के कंधों पर आ टिका है।
हालात यह है कि उपलब्ध तीन कमरों में से एक कमरा प्राइमरी स्कूल से उधार लेना पड़ा है और फिर भी एक अतिरिक्त कमरे की सख्त दरकार है। स्कूल में सुविधाओं की बदहाली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लगभग 50 विद्यार्थियों के लिए फर्नीचर तक नहीं है। केवल आठवीं कक्षा के बच्चों को बेंच नसीब हो पाते हैं, जबकि छठी और सातवीं के छात्र जमीन पर दरी बिछाकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
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बरामदे के फर्श पर लग रही छठी की क्लास
घसीटपुर स्थित मिडिल स्कूल की भी यही स्थिति है। यहां कुल 79 विद्यार्थियों पर पांच शिक्षक कार्यरत हैं, लेकिन बुनियादी ढांचा पूरी तरह चरमराया हुआ है। स्कूल में मात्र दो कमरे उपलब्ध हैं, जिनमें सातवीं और आठवीं कक्षा के बच्चों को जैसे-तैसे बैठाया जाता है। जगह कम पड़ने के कारण छठी कक्षा के बच्चों को बाहर बरामदे में फर्श पर दरी बिछाकर बैठना पड़ता है।
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