धुंध में ट्रेन के लोको पायलट को स्टेशन के आने का पता नहीं चल पाता था। इसीलिए लोको पायलट को दूरी के हिसाब से ट्रेन की स्पीड को कम करना पड़ जाता था। कई बार स्टेशन से पूर्व सिग्नल भी धुंध में दिखाई नहीं देते थे। इसीलिए लंबी दूरी की एक्सप्रेस ट्रेन एक-एक दिन तक लेट हो जाती है और यात्रियों को दिक्कत का सामना करना पड़ता था। रेलवे ने अब इस समस्या से निजात के लिए एक ऐसी डिवाइस को तैयार किया है जो जीपीआरएस पर आधारित होगी। इसके अलावा रेलवे स्टेशन से ऑटो कनेक्टिड होगी और एक्सप्रेस ट्रेन जैसे ही किसी रेलवे स्टेशन के नजदीक पहुंचेगी उसकी डिवाइस पर ऑडियो के साथ-साथ वीडियो मैसेज में आएगा।
मैसेज से लोको पायलट को पता चल जाएगा कि रेलवे स्टेशन पर रास्ता क्लीयरेंस है या फिर कोई काम चल रहा है। लोको पायलट रेलवे स्टेशन से डिवाइस के जरिए मिलने वाले मैसेज को देखकर यह निर्णय ले सकेगा कि ट्रेन की स्पीड को कम करना है या फिर नहीं। अभी तक लोको पायलट के पास ऐसी कोई डिवाइस नहीं थी। इससे लोको पायलट को न सिर्फ ट्रेन को निर्धारित स्पीड से लेकर जाने में कोई दिक्कत नहीं आएगी। रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि यह डिवाइस आ गई है और लोको पायलट को दी जा रही है। इसकी टेस्टिंग भी हो चुकी है। अब सिग्नल से पहले ही रेलवे स्टेशन की स्थिति लोको पायलट के पास होगी। अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन की बात करें तो यहां से रोजाना 300 के करीब मेल, एक्सप्रेस, सुपरफास्ट समेत अन्य ट्रेनें होकर आती-जाती हैं।
पेट्रोलिंग भी बढ़ेगी
उत्तर रेलवे अंबाला मंडल की बात करें तो अंबाला-दिल्ली, अंबाला-सहारनपुर, अंबाला-अमृतसर, अंबाला-चंडीगढ़ रूट पर ट्रेनें रोजाना आती-जाती हैं। इसीलिए उत्तर रेलवे ने अंबाला मंडल के अधीन आने वाले इन रूट पर पेट्रोलिंग भी बढ़ाने का फैसला लिया है। रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि सर्दी के मौसम में रेलवे ट्रैक की पेट्रोलिंग बहुत जरूरी है और खासकर ऐसे रेलमार्ग जिस पर रात के समय में ट्रेनों का सिलसिला कम हो। क्योंकि ठंड के मौसम में ट्रेन के गुजरने से गर्म हुआ लोहा जल्दी ही ठंडा हो जाता है। ऐसे में शाम से लेकर सुबह तक तापमान में काफी गिरावट आ जाती है तो लोहा सिंगुड जाता है। इसीलिए रेलवे लाइन में क्रेक हो जाती है और यदि यह क्रेक ज्यादा हो तो रेलवे ट्रैक से ट्रेन उतरने की घटनाएं हो जाती है। इसके अलावा बड़ा हादसा होने से भी इंकार नहीं किया जा सकता।
- रेलवे अपने लोको पायलट को एक खास डिवाइस दे रहा है जिससे पायलट को रेलवे स्टेशन से पहले जानकारी मिलेगी। इससे लोको पायलट को काफी फायदा होने के साथ-साथ रेलवे की ट्रेनों की टाइमिंग भी खराब नहीं होगी। पेट्रोलिंग को बढ़ाया जाएगा तकि रेलवे ट्रैक में दरार की वजह से कोई हादसा न हो।
- टीपी सिंह, महाप्रबंधक, उत्तर रेलवे।