अंबाला। लाखों रुपये की लागत से अंबाला छावनी के बाजारों और रिहायशी क्षेत्रों में लगी फैंसी और स्ट्रीट लाइट्स बंद हो रही हैं। इससे बाजारों और गली-मोहल्लों में अंधेरा छाने लगा है। यह हालात निकलसन रोड और फारुखा खालसा स्कूल सहित सुभाष पार्क के सामने डिवाइडर पर बंद लाइटों को देखकर लगाया जा सकता है।
ऐसे ही हालात गली-मोहल्लों में भी नजर आ रहे हैं, जहां रात होते ही अंधेरा पसर जाता है, बावजूद इसके नगर परिषद के कर्मचारी इस तरफ ध्यान नहीं दे रहे। इसका खामियाजा स्थानीय निवासियों को झेलना पड़ रहा है और उन्हें चोरी और छीना-झपटी का डर सता रहा है जबकि नगर परिषद में मात्र दो कर्मचारियों के सहारे ही रिपेयर का कार्य किया जा रहा है जोकि 1200 लाइटों को दुरुस्त करने के लिए नाकाफी हैं।
सामान की कमी
फैंसी और स्ट्रीट लाइटों को दुरुस्त करने का सामान भी नगर परिषद के पास नहीं है। इसलिए अगर कोई लाइट खराब हो जाती है तो उसका पुर्जा मंगाने में ही काफी समय बीत जाता है। हैरानी की बात है कि रोजाना नगर परिषद में स्ट्रीट लाइटों से संबंधित 10 से 15 शिकायतें पहुंचती है, लेकिन बमुश्किल तीन से चार लाइटें ही दुरुस्त हो पाती हैं। सबसे बड़ी परेशानी ऊंचाई पर लगी लाइटों को दुरुस्त करने की है, जिन्हें ठीक करने के लिए नगर परिषद के पास अपनी कोई भी मशीन नहीं है, उन्हें इस कार्य के लिए या तो दूसरे विभाग से मदद लेनी पड़ती है तो या फिर किराए पर मशीन का प्रबंध करना पड़ता है।
खुले तार बन रहे हादसे का सबब
शुरुआत में जब फैंसी और स्ट्रीट लाइटों को कंपनी के नुमांइदों की ओर से बाजारों और गली-मोहल्ले में लगाया था, तब इनके जोड़ को सुरक्षित रखने के लिए भी प्लेट्स लगाई थी लेकिन लाइटों को रिपेयर करने वाले कर्मचारियों ने इन प्लेटों को या तो तोड़ दिया या गुम कर दिया। ऐसे में जब भी लाइट खराब होती है तो इसकी तारों का जोड़कर खुले में ही लटका दिया जाता है और इससे हादसे का डर बना रहता है कि कहीं कोई जानवर या फिर बच्चा इनकी चपेट में न आ जाए।
खर्च के लिए पैसे नहीं मिलते
नगर परिषद के लिए बड़ी समस्या ठेकेदार की है। ठेका जारी होने के बाद काम तो होता है, लेकिन ठेकेदार की पेमेंट का भुगतान समय पर नहीं हो पाता। अपने जेब से लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी जब ठेकेदार को पैसे नहीं मिलते तो वो फिर बीच में ही काम छोड़कर चला जाता है और फिर उसे अपने पैसे लेने के लिए नप कार्यालय के दर्जनों चक्कर काटने पड़ते हैं, इसलिए कोई भी ठेकेदार इन फैंसी और स्ट्रीट लाइटों को रिपेयर करने की निविदा में हिस्सा ही नहीं लेता।
तिरंगा लाइटें भी हो गईं बंद
अंबाला छावनी के बाजारों के सौंदर्यीकरण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च हो चुके हैं, कहीं सड़कों को बनाया गया है तो कहीं फैंसी लाइट्स के खंभे लगाए गए हैं, वहीं इन खंभों पर लाखों रुपये की लागत से तिरंगा लाइट्स लगाई गई थी जोकि अब पूरी तरह से बंद हो चुकी हैं। अब न तो बाजारों में यह जलती नजर आती हैं और न ही अंबाला-साहा नेशनल हाइवे पर। वहीं अधिकारियों का तर्क है कि ये चाइनीज लाइटें एक सीजन निकाल जाएं तो बहुत है, इन्हें रिपेयर करना काफी महंगा साबित होगा। इसलिए जब भी पर्व आएगा तो फिर लाखों रुपये खर्च करके तिरंगा लाइट्स लगा दी जाएंगी।
वर्जन
ऐसा नहीं है कि फैंसी व स्ट्रीट लाइटों की रिपेयर का काम नहीं हो रहा। इसके लिए विशेष सैल बनाया है जोकि शिकायत मिलते ही तुरंत कार्रवाई करता है। कभी सामान के कारण थोड़ी-बहुत दिक्कत हो जाती है। इस वजह से शिकायत दूर करने में समय लग जाता है। फिर भी अपने स्तर पर एक बार बाजारों और गली-मोहल्लों में लगी लाइटों की स्थिति देखकर ही कुछ कहा जा सकता है।
मंदीप सिंह, कार्यकारी अभियंता, नप सदर।
अंबाला छावनी के दयालबाग कॉलोनी की सड़क पर बंद पड़ी स्ट्रीट लाइट। संवाद