बालिकाओं के विकास के लिए या उनके अधिकारों के लिए किसी भी एक अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस का इंतजार नहीं करना चाहिए। हर दिन बालिकाओं के विकास के लिए काम करना चाहिए। यह विचार समाजसेवी महिलाओं ने अमर उजाला के अपराजिता कार्यक्रम से जुड़कर रखे। महेश नगर के एक निजी रेस्तरां में आयोजित कार्यक्रम में समाजसेवी महिलाओं ने कहा कि आज लड़कियों हर क्षेत्र में आगे हैं, चाहे वो शिक्षा, डॉक्टरी हो या फिर सेना में जाने की।
इस दिन को मनाने का उद्देश्य लोगों को इस बात के लिए जागरूक करना है कि लड़कियों को भी समाज में उतनी ही अधिकार और इज्जत देनी चाहिए, जितनी लड़को को मिलती है। लड़कियों का भी पूरा अधिकार बनता है कि वह समाज में अपनी बात को रख सकें और उन पर हो रहे किसी भी प्रकार के अन्याय के खिलाफ आवाज उठा सकें। यह दिन उन लोगों को भी जागरूक करने के लिए है जो की लड़कियों को सामाजिक सीमाओं में बांध कर रखते हैं।
ममता गोयल, समाजसेवी
बालिका शिशु के साथ भेद-भाव एक बड़ी समस्या है जो कई क्षेत्रों में फैली है, जैसे शिक्षा में असमानता, पोषण, कानूनी अधिकार, सुरक्षा, सम्मान, बाल विवाह आदि। अब समय आ गया है कि इस सोच को खत्म कर देना चाहिए। बड़े हैरानी की बात यह है कि अभी तक इस विषय पर लोगों को जागरूक करने की जरूरत पढ़ रही है।
नीरू गुप्ता, समाजसेवी
लड़कियों के लिये ये बहुत जरुरी है कि वो सशक्त, सुरक्षित और बेहतर माहौल प्राप्त करें। उन्हें जीवन की हर सच्चाई और कानूनी अधिकारों से अवगत होना चाहिये। उन्हें इसकी जानकारी होनी चाहिये कि उनके पास अच्छी शिक्षा, पोषण, और स्वास्थ्य देख-भाल का अधिकार है।
जसप्रीत
हमारे समाज की कई वर्गों कि लोगों मे आज भी ये सोच है कि लड़कियां कहीं न कहीं लड़कों से पीछे हैं। वक्त आ गया है लड़का लड़की में अंतर जैसी सोच को समाज से बाहर फेंकने की और हमारे समाज की बहु बेटियों को उनके पुरे हक देने की। लड़कियां लड़कों के बराबर है, बस जरुरत है तो हमे अपनी सोच बदलने की। लड़कियों को हर क्षेत्र में मौका देना चाहिए।
कल्पना बंसल, समाजसेवी