अनसुने किस्से...
कटारिया जी कहते थे, कहीं चले जाओ सब पद टेंपरेरी है, कार्यकर्ता ही पर्मानेंट
सतनाम सिंह
अंबाला सिटी। सांसद रतनलाल कटारिया को अंबाला शहर विधायक असीम गोयल अपने बुजुर्ग के नाते मार्गदर्शक मानते थे। जीवन में कभी भी चाहे राजनीतिक या व्यक्तिगत सलाह लेनी हो तो उन्होंने रतन लाल कटारिया से बात साझा की। 1996-97 में विधायक असीम गोयल पहली बार रतनलाल कटारिया से मिले और 1999 के लोकसभा चुनाव में कटारिया के पूरी तरह से संपर्क में आए। गोयल तब से उनके साथ रहे। विधायक गोयल ने रतनलाल कटारिया की शवयात्रा में कंधा भी दिया।
विधायक ने बताया कि कटारिया जी कहते थे, कहीं चले जाओ सब पद टेंपरेरी हैं, कार्यकर्ता पर्मानेंट होता है। भाजपा का मंत्र है कि देश सबसे पहले, फिर पार्टी और तीसरे नंबर पर खुद यानि कार्यकर्ता। पिछले करीब 50 साल में पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सांसद रतनलाल कटारिया जी ने इस मंत्र का पालन किया। वह खुद को कार्यकर्ता समझते थे। वह ऐसे व्यक्ति थे, जिन्हें जहां मर्जी बिठा दिया और जो मर्जी कह दिया। कटारिया जी 1996-97 में वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के चेयरमैन थे। तब उनके साथ पहली बार मुलाकात हुई थी। तब मैंने पहली बार उनके साथ चाय पी थी। 1999 में कटारिया जी को लोकसभा की टिकट मिली थी तो तब मैं उनके साथ पूरी तरह से संपर्क में आया था। चुनाव जीतने के बाद वह प्रदेशाध्यक्ष भी रहे। उन्होंने किसी भी पद को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया।
डायरी लिखने की थी आदत, भूलते नहीं थे 20 साल पुरानी बातें
मैं 1989 से भाजपा से जुड़ी हूं। 1994 में पार्षद भी बनी। 1999 के लोकसभा चुनाव में मीटिंग में मेरा परिचय रतनलाल कटारिया जी से हुआ। तब मैं प्रदेश कार्यकारिणी की सदस्य भी थी। तब से लेकर अब तक हमारे उनके साथ पारिवारिक संबंध हैं। वह जब भी हमारे घर आते थे तो सबसे पहले माता-पिता जी से मिलते थे। उनकी याददाश्त भी काफी तेज थी। 20 साल पुरानी बात भी उनको याद रहती थी। उनकी डायरी लिखने की आदत भी अच्छी थी। वह हर चीज लिखते थे। कटारिया जी सांसद से लेकर केंद्रीय मंत्री के पद तक रहे, मगर उनकी सादगी नहीं बदली।
नीता खेड़ा, पूर्व सदस्य, हरियाणा पब्लिक सर्विस कमिशन।