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नारायणगढ़ सीट : भाजपा से एकमात्र नायब सैनी ही जीते

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सतनाम सिंह
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अंबाला सिटी। नारायणगढ़ विधानसभा सीट पर सभी राजनीतिक पार्टियों ने अपने पत्ते खोल दिए हैं। इस सीट पर कांग्रेस से शैली चौधरी, भाजपा से पवन सैनी, बसपा से हरबिलास सिंह, आप से गुरपाल सिंह मैदान में है। इसलिए यह जिले में चर्चित सीट भी बन गई है। ये सीट सीएम नायब सिंह का गृह क्षेत्र होने के कारण उनकी प्रतिष्ठा से भी जुड़ी है।
इस सीट का इतिहास देखें तो 2014 में भाजपा से नायब सैनी यहां से एकमात्र विधायक चुने गए थे। इस सीट पर ज्यादातर कांग्रेस का दबदबा रहा है। यहां से कांग्रेस पांच बार जीत चुकी है। वहीं बसपा और इनेलो ने भी अपने नतीजों से सबको चौंकाया है। खास बात यह भी है कि इस सीट पर मुख्यमंत्री नायब सैनी ही अब तक सबसे ज्यादा वोट के अंतर से जीते हैं। 2014 में भाजपा के नायब सैनी ने कांग्रेस के राम किशन को 24,361 वोट के अंतर से हराया था। इसके बाद 2019 में रामकिशन की पत्नी शैली चौधरी भाजपा प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह को हराकर विधायक बनी थी। इस बार फिर सीट पर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने है।
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नारायणगढ़ सीट पर दो लाख से कम मतदाता
नारायणगढ़ में 1 लाख 880 पुरुष, 90 हजार 240 महिला और 9 थर्ड जेंडर मतदाता हैं। यहां कुल 1 लाख 91 हजार 129 मतदाता हैं। इनमें 1162 पीडब्ल्यूडी, 2185 मतदाता 85 वर्ष से ज्यादा आयु के, 100 वर्ष से ज्यादा आयु के 104, एनआरआई 4, सर्विस वोटर 1211 व 18 से 19 वर्ष के 3655 मतदाता हैं।
कब, कौन, कितनी वोट के अंतर से जीता
-1967 में कांग्रेस के एल सिंह को 16,691 वोट मिली। उन्होंने एबीजेएस के आरएन सरूप को 8,163 वोट से हराया। आरएन सरूप को 8 हजार 528 वोट मिली।
-1968 में कांग्रेस के लाल सिंह को 14,745 वोट मिली। बीकेडी के जगत नारायण को 3,585 वोट मिली। लाल सिंह ने जगत नारायण को 11,160 वोट से हराया।
-1972 में कांग्रेस के जगजीत सिंह को 21,818 वोट मिली। निर्दलीय साधू राम को 14,556 वोट मिली। जगजीत सिंह ने साधू राम को 7,262 वोट से हराया।
-1977 में जनता पार्टी से लाल सिंह को 20,909 वोट मिले। कांग्रेस के जगजीत सिंह को 12,482 वोट मिले। लाल सिंह ने जगजीत सिंह को 8,427 वोट से हराया।
-1982 में निर्दलीय लाल सिंह को 18,91 वोट मिले। कांग्रेस के जगजीत सिंह को 13,842 वोट मिले। लाल सिंह 4,249 वोट से जीते।
-1987 में निर्दलीय जगपाल सिंह को 24,456 वोट मिले। एलकेडी के साधू राम को 12,363 वोट मिले। जगपाल सिंह 12,093 वोट से जीते।
-1991 में बसपा के सुरजीत सिंह को 15,407 वोट मिले। कांग्रेस के अशोक कुमार को 10,869 वोट मिले। सुरजीत कुमार 4,538 वोट से जीते।
-1996 में एचवीपी के राजकुमार को 22,309 वोट मिले। बसपा के मान सिंह को 14,262 वोट मिले। राजकुमार 8,047 वोट से जीते।
-2000 में इनेलो पवन कुमार को 32,092 वोट मिले। कांग्रेस के लाल सिंह को 24,659 वोट मिले। पवन कुमार 7,433 वोट से जीते।
-2005 में कांग्रेस के राम किशन को 40,877 वोट मिले। इनेलो के पवन कुमार को 33,114 वोट मिले। राम किशन 7,763 वोट से जीते।
-2009 में कांग्रेस के राम किशन को 37,298 वोट मिले। इनेलो के राम सिंह को 28,978 वोट मिले। राम किशन 8,320 वोट से जीते।
-2014 में भाजपा के नायब सिंह को 55,931 वोट मिले। कांग्रेस के राम किशन को 31,570 मिले। नायब सिंह 24,361 वोट से जीते।
- 2019 में कांग्रेस की शैली चौधरी को 53,470 वोट मिले। भाजपा के सुरेंद्र सिंह को 32,870 वोट मिले। शैली 20,600 वोट से जीती।
वर्ष कौन जीता
1967 कांग्रेस से एल सिंह
1968 कांग्रेस से लाल सिंह
1972 कांग्रेस से जगजीत सिंह
1977 जनता पार्टी से लाल सिंह
1982 निर्दलीय लाल सिंह
1987 निर्दलीय जगपाल सिंह
1991 बहुजन समाज पार्टी से सुरजीत कुमार
1996 हरियाणा विकास पार्टी से राजकुमार
2000 इनेलो से पवन कुमार
2005 व 2009 कांग्रेस से राम किशन
2014 भाजपा से नायब सिंह
2019 कांग्रेस से शैली चौधरी
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