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चुनावी दंगल तैयार, उम्मीदवारों का इंतजार

Mon, 09 May 2016 01:26 AM IST
अंबाला ब्यूरो/ अमर उजाला
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चुनाव - फोटो : file
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नारायणगढ़ नगर पालिका का चुनावी दंगल सजकर पूरी तरह से तैयार है। प्रशासन ने भी चुनावी प्रक्रिया शुरू कर दी है और 22 मई को नारायणगढ़ नगर पालिका के 15 वार्डों का चुनाव भी होने वाला है। लेकिन इस दंगल में इनेलो, भाजपा और कांग्रेस से कौन-कौन उम्मीदवार जोर आजमाइश करेंगे, उनका अभी तक कुछ पता ही नहीं है।
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इतना ही नहीं चुनाव लड़ने के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल करने की आखिरी तारीख भी 11 मई है। इसके बावजूद राजनीतिक पार्टियां अपने-अपने प्रत्याशियों के चयन के लिए माथापच्ची में लगी हुई है। दरअसल, ये चुनाव इन तीनों पार्टियों के लिए बड़ी प्रतिष्ठा का सवाल है। लिहाजा तीनों पार्टियां ऐसे प्रत्याशियों पर दांव खेलना चाहती है, जो पार्टियों झोली में जीत का तोहफा डाल सके। इसीलिए ये पार्टियां अपने समर्थित प्रत्याशियों का चयन करने को लेकर अभी तक पसोपेश में फंसी हुई है। उधर, नामाकंन भरने की प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन उम्मीदवार के इंतजार में घंटों खाली बैठे रहते हैं।

भाजपा ढूंढ रही है जीताऊ चेहरे 
नारायणगढ़ नगर पालिका की हार और जीत सीधे हरियाणा सरकार के राज्यमंत्री नायब सैनी की राजनीतिक साख से जुड़ी है। वे राज्यमंत्री के साथ-साथ नारायणगढ़ हल्के के भाजपा से विधायक भी हैं। इसलिए इस चुनाव की पूरी बागडोर भी पार्टी ने उन्हीं के कंधों पर छोड़ रखी है। हालांकि भाजपा वार्डों के इस चुनाव का भी पूरी संगठनात्मक ढंग से लड़ेगी। इसके तहत सभी वार्डों से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने वालों के नामों के आवेदन भी पार्टी कार्यकर्ताओं व स्थानीय नेताओं से मांग लिए गए हैं। राज्यमंत्री चाहते हैं कि जो भी प्रत्याशी भाजपा की ओर से खड़ा हो, वह वार्ड में जीत को सुनिश्चित जरूर करे। राज्यमंत्री चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा पार्षद उन्हीं के हों, तो वे आसानी से अपना ही नगर पालिका का अध्यक्ष व उपाध्यक्ष भी बना सकते हैं। राज्यमंत्री चाहते हैं कि मैदान में वही उतरे, जो दूसरी राजनीतिक पार्टियों के पहलवानों को चित कर जीत दर्ज करे। इसी माथापच्ची में भाजपा प्रत्याशियों की सूची जारी करने में देरी कर रही है।
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कांग्रेस को फूट की चिंता, अलग रहेगा समर्थन का तरीका 
इस चुनावी दंगल में कांग्रेस शायद अपने प्रत्याशी सीधे तौर पर घोषित न करे। पार्टी को अभी से ही वार्डों में टिकट की मारामारी के चलते फूट की चिंता सताने लगी है। कांग्रेस की ओर से चुनाव जितवाने का बीड़ा उठाने वाले पूर्व संसदीय सचिव व दस साल से लगातार विधायक रहे रामकिशन गुज्जर भी यह मानते हैं कि पार्टी टिकट पर चुनाव लड़ने वालों की संख्या बहुत ज्यादा है, इसलिए इस बार इस चुनाव में कांग्रेस कुछ अलग ढंग से अपना समर्थन प्रत्याशियों को देगी। इसलिए कांग्रेस एक अलग ढंग से चुनावी रणनीति के तहत चुनाव में उतरेगी।पार्टी के स्थानीय आला पदाधिकारी इस प्रयास में जुटे हैं कि वार्डों से एक वर्कर के नाम पर सभी दावेदारों को मना लिए जाए और उसी कांग्रेस वर्कर को समर्थन देते हुए चुनावी दंग में झोका जाए। हालांकि कई जगह टिकट के दावेदार पार्टी की इस नीति को समझने में आनाकानी करते हुए चुनाव लड़ने की जिद पर अड़े हैं। इसलिए पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि जिस वार्ड में कांग्रेस का एक वर्कर चुनाव लड़ेगा, वहां पार्टी खुलकर उसके पक्ष में समर्थन करेगी और जहां पार्टी के दो वर्कर आपस में ही एक-दूसरे के खिलाफ लड़ेंगे तो पार्टी खुद को दोनों से ही दूर रखेगी। इसी पसोपेश में कांग्रेस ने भी अभी तक अपने समर्थित प्रत्याशियों की सूची जारी नहीं की है।

इनेलो को खाता खुलने की आस
इनेलो का जनाधार यदि नारायणगढ़ हल्के में देखा जाए तो कम नहीं है। 1999 से 2004 वर्ष तक विधायक इस हल्के में रहा है। उसके बाद भी इनेलो प्रत्याशियों ने इस हल्के से सम्मानजनक वोट हासिल किए हैं। लेकिन नगर पालिका के वार्डों में आज तक पार्टी ने अपना खाता नहीं खोला है। इसलिए इस बार पार्टी ने ये ठान ली है कि कम से कम इस बार अपना खाता जरूर खोलेगा। इसलिए इनेलो भी अपने प्रत्याशियों को घोषित करने में देरी कर रही है। इनेलो ने भी अपने इच्छुक वर्करों से सभी वार्डों में चुनाव लड़ने के लिए आवेदन करने को कह दिया है। आवेदन पहुंचे भी हैं, लेकिन अभी तक अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। पार्टी को भी इन दावेदारों में से जिताऊ चेहरों की तलाश है।

सभी वार्डों में प्रत्याशी जीतें, भाजपा का फोकस इसी बात पर रहेगा। प्रत्याशियों के चयन पर थोड़ा वक्त लग रहा है। बहुत जल्द भाजपा अपने प्रत्याशियों के नाम फाइनल कर देगी और नगर पालिका पर अपना कब्जा करेगी।
नायब सैनी, राज्यमंत्री एवं हल्का विधायक

कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने वालों की संख्या बहुत ज्यादा है। कार्यकर्ताओं में कांग्रेस समर्थित होकर चुनाव लड़ने का बहुत क्रेज है। इसलिए पार्टी को नाम घोषित करने में थोड़ी पसोपेश की स्थिति झेलनी पड़ रही है। इसलिए जिस वार्ड में पार्टी का एक प्रत्याशी मैदान में होगा, वहां खुला समर्थन रहेगा और जिस वार्ड में एक ज्यादा वर्कर बतौर आजाद मैदान में होंगे, वहां से पार्टी दूर रहेगी।
रामकिशन गुर्जर, पूर्व संसदीय सचिव एवं पूर्व हल्का विधायक

चाहे कुछ भी हो जाए, इस बार वार्ड चुनाव  में इनेलो अपना खाता खोलकर ही रहेगी। पार्टी की बैठक सोमवार को रखी गई है। उसके बाद नामों को फाइनल कर दिया जाएगा।
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जगमाल रौलों, वरिष्ठ इनेलो नेता
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