बराड़ा। श्री गोविंद गोशाला समिति की ओर से आयोजित श्रीमद् भागवत साप्ताहिक कथा के छठे दिन मुख्य यजमान मास्टर राजेंद्र प्रसाद सिंगला ने दीप प्रज्वलित करके शुभारंभ किया।
वृंदावन से पधारे कृष्ण कथा मनीषी और मर्मज्ञ भक्तिवेदांत सिद्धांती महाराज ने हरि कथा रूपी अमृत की वर्षा करते हुए बताया कि प्रत्येक युग का अलग-अलग धर्म है। जैसे सतयुग का तपस्या, त्रेता का यज्ञ, द्वापर का विग्रह अर्चना एवं कलियुग का हरिनाम। उन्होंने बताया की हरी का नाम ही कलियुग में उद्धार करने का एक मात्र साधन है तथा इसके बिना और कहीं गति नहीं है।
अजामिल के प्रसंग का उपाख्यान सुनाते हुए महाराज ने बताया की अजामिल ने मरते समय अपने पुत्र का नाम नारायण पुकारा, उतने से ही नारायण के दूत उसे लेने के लिए आ गए और अजामिल का उद्धार हो गया। जब अन्निच्छा पूर्वक नाम लेने का इतना फल है तो विश्वास और श्रद्धा के साथ लिए गए नाम का कितना फल होगा।
उन्होंने भक्तों को कथाएं सुनाई। हनुमान तो जहां भी हरि कथा होती है वहीं पर आज भी उपस्थित रहते हैं। हरी व उनकी कथा अनंत है। भागवत की कथा का इतना विस्तार है कि इसको सात दिन में श्रवण नहीं कराया जा सकता।
इसलिए कहा गया है, नित्यम भागवत सेव्या। भागवत जी का अंतिम श्लोक एवं सार हरिनाम संकीर्तन को ही इंगित कर रहा है। भगवान के नाम को भगवान से भी बड़ा बताया गया है। 16 मार्च सुबह आठ बजे भक्तों को महाराज द्वारा हरिनाम व दीक्षा दी जाएगी। इस अवसर पर राजेश सिंगला, प्रमोद जैन, अशोक बंसल, श्रवण गोयल, बृजमोहन, डॉ कुलदीप गुप्ता, राजेश्वर, सुखबीर सिंह सहित श्री कुंजबिहारी गौडीय मठ के सदस्य व भारी संख्या में धर्म प्रेमी लोग व मातृशक्ति उपस्थित रही।