म्यूटेशन की पॉवर के फेर में अंबाला सदर की जनता परेशान है। यह पॉवर न तो ईओ को अलॉट की गई न सचिव को दी गई। इस वजह से ऐसी 450 से ज्यादा फाइलें नगर परिषद ऑफिस की टैक्स ब्रांच में धूल फांक रही हैं। निगम की तरह परिषद में भी अधिकारी इस मसले पर जमकर मनमानी कर रहे हैं। यह हाल तब है जब नप में ईओ के साथ-साथ नए सचिव भी पदभार संभाल चुके हैं। बावजूद इसके म्यूटेशन की पॉवर न ईओ न सचिव के पास है। यह मामला अब डीसी दरबार पहुंच गया है।
दो साल से चक्कर काट रहे लोग
म्यूटेशन कराने के लिए लोग एक दो माह से नहीं बल्कि दो-दो साल से चक्कर काट रहे हैं। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। लोगों का कहना है कि तहसील कार्यालय से सभी तरह की औपचारिकताएं पूरी करके म्यूटेशन से संबंधित दस्तावेज नगर निगम की टैक्स ब्रांच में जमा करा चुके हैं। फाइल के साथ-साथ प्रॉपर्टी से संबंधित हाउस टैक्स भी जमा करा चुके हैं। नपा कार्यालय से उनको पहले कहा गया है कि ईओ नहीं हैं। जब से ईओ आए तब से म्यूटेशन पॉवर नहीं होने का रोना रोया जा रहा है। करीब दो माह से नप में आदर्श आचार संहिता के चलते काम लटका था। इसीलिए जनता आचार संहिता के चलते नपा कार्यालय नहीं गई। अब चुनाव भी हो चुके हैं और नपा को ईओ के साथ-साथ सचिव भी मिल चुके हैं। दो-दो अधिकारी होने के बावजूद नप में म्यूटेशन का काम न होने की बात जनता को रास नहीं आ रही है।
कानूनी राय की कार्रवाई भी नहीं हुई
नप कार्यालय की टैक्स ब्रांच का हाल यह है कि म्यूटेशन की नई फाइल जब जमा होती है तो ब्रांच के अधिकारी इसे चेक करते हैं। जब फाइल पूरी हो जाती है तो उसको कानूनी राय के लिए अपने लीगल एडवाइजर के पास भेजते हैं। यदि लीगल एडवाइजर को लगता है कि प्रॉपर्टी की म्यूटेशन नहीं हो सकती है या फिर कोई कानूनी पेंच है तो वह फाइल पर ऑब्जेक्शन लगा देता है। लेकिन करीब 100 के करीब फाइलें ऐसी हैं जो कानूनी राय के लिए भी नप कार्यालय से नहीं गई हैं।
डीसी के पास होगी म्यूटेशन की पॉवर
अब यह मामला ईओ, सचिव और एसडीएम के पास पहुंच चुका है। इसीलिए नपा अधिकारियों ने म्यूटेशन का लंबित मामला और पॉवर को लेकर एक प्रपोजल एस्टेट ऑफिसर एवं डीसी अशोक कुमार शर्मा के पास भेजी है। अब यह तय होना बाकी है कि म्यूटेशन की पॉवर डीसी अपने पास रखते हैं या फिर इसकी पॉवर नपा ईओ को सौंपी जाएगी। अंबाला छावनी के सदर एरिया एक्साइज जमीन से जुड़ा है इसीलिए पॉवर का मामला पेचीदा हो गया है।
11 सितंबर को परिषद बनी थी छावनी
साल 2009 में छावनी को नगर परिषद से नगर निगम बनाया गया था। करीब पांच साल तक निगम राम भरोसे चला और साल 2014 में निगम के पहले चुनाव हुए थे। 2019 में कार्यकाल खत्म हो गया। इसके बाद 11 सितंबर 2019 को शहरी एवं स्थानीय निदेशालय चंडीगढ़ ने नई नोटिफिकेशन जारी कर नगर निगम अंबाला से नगर निगम अंबाला सदर जोन के एरिया को निकाल कर नगर परिषद बना दिया था।
जनता चक्कर काट रही है
- म्यूटेशन को लेकर जनता निगम कार्यालय के चक्कर काट रही है और कोई सुनवाई नहीं हो रही है। फाइलें लंबे समय से निगम कार्यालय में धूल फांक रही है अब तो आचार संहिता भी खत्म हो चुकी है और म्यूटेशन करने का काम शुरू नहीं हो पाया है।
- सुधीर जायसवाल, पूर्व डिप्टी मेयर अंबाला
फोटो 04
नप बनने से फायदा नहीं मिल रहा
निगम से नप बनने से जनता को उम्मीद थी कि उनके काम तेजी से होंगे। लेकिन उम्मीद के मुताबिक काम नहीं हो पा रहे हैं। म्यूटेशन न होने से लोगों के लोन समेत अन्य काम लटके हैं। फिलहाल नप बनने से कोई फायदा होता नजर आ रहा है बल्कि अधिकारियों का कद छोटा होने से खुद निर्णय नहीं ले पाते।
- सतीश कनौजिया, प्रदेशाध्यक्ष, कनौजिया महासभा
-------
कोट्स
- म्यूटेशन करने की पॉवर को लेकर डीसी के पास फाइल भेजी गई है और उम्मीद है कि जल्द ही इस पर कोई फैसला हो जाएगा। इसके बाद म्यूटेशन का काम शुरू कर दिया जाएगा ताकि जनता को राहत मिल सके।
- विनोद नेहरा, ईओ, नगर परिषद अंबाला छावनी।
------