अंबाला। सिटी की वैभवी कौशल वो नाम है जिसने पांच महीने में ही ब्लड कैंसर को शिकस्त दे दी। बीमारी के खिलाफ उसके हौसले व हिम्मत को देखकर डॉक्टर भी दंग रह गए। अब ब्रांड एंबेसडर बनकर वैैभवी दूसरे मरीजों को बीमारी के खिलाफ लड़ना सिखा रही है। आमतौर पर लोग इस बीमारी का नाम सुनते ही जिंदगी जीने तमन्ना छोड़ देते हैं। मगर वैैभवी ऐसे मरीजों को बीमारी से लड़कर जीना सिखाने में जुटी है।
वे कहती हैं कि उसने कैंसर को लोगों से छिपाने की जगह बल्कि उसे मरीजों के सामने रखना उचित समझा। यही वजह है कि वैभवी की आपबीती सुनकर मरीजों में जीने की चाह बढ़ जाती है। वैभवी की माने तो वह बीमारी को मात देकर वह खुशहाल जिंदगी जी रही है। रोटरी जनरल एंड कैंसर अस्पताल की सहयोगी विंग स्नेह स्पर्श ने उसे अपना ब्रांड एंबेसडर बनाया है।
बुखार से पता चला कैंसर, दवा के ज्यादा हिम्मत सबसे बढ़ा हथियार
वैभवी कौशल ने बताया कि 2010 में उनका बेटा पैदा हुआ तो डिलीवरी के बाद बुखार आया। चैकअप के दौरान पता चला कि ब्लड कैंसर हो गया। मायके और ससुराल वालों ने किसी को कुछ भी नहीं बताया। आखिरकार पता चल ही गया कि उन्हें कैंसर है। सोचा बीमारी से डर जाऊंगी तो लडूंगी कैसे? पीजीआई में इलाज के लिए गई तो डॉ. पंकज मल्होत्रा से पिता जैसा प्यार मिला और केयर भी। इस सफर में पता चला कि दवा से ज्यादा मरीजों में इस बीमारी से लड़ने की हिम्मत व जुनून होना जरूरी है। यही बीमारी से लड़ने का सबसे बड़ा हथियार है।