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जेल में बल्व, पंखे व तारों के सर्केट में जुगाड़ बिठा बैटरी चार्ज कर रहे बंदी-कैदी

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सेंट्रल जेल से लगातार मोबाइल फोन मिलने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। पिछले पांच सालों में सेंट्रल जेल में 269 मोबाइल और चार्जर बरामद हो चुके हैं। इसके बावजूद अधिकारियों की ओर से ठोस कदम नहीं उठाए गए और पुलिस में शिकायत देकर औपचारिकता पूरी कर दी गई। हालात यह हैं कि जेल के भीतर से ही अपराधों की रणनीति तैयार हो रही हैं। हाल ही में कालका चौक पर हुआ दोहरा हत्याकांड इसका ताजा उदाहरण है। सवाल यह है कि जेल में जैसे-तैसे फोन और चार्जर तो बंदी और कैदियों के पास पहुंच जाते हैं लेकिन फोन की बैटरी चार्ज कहां से होती है? खुद अधिकारी भी इस मामले से अनजान हैं। दरअसल, बंदी सेंट्रल जेल में जुगाड़ कर बल्ब, पंखे व तारों के सर्किट को चार्जिंग प्वाइंट बनाते हैं। यहीं से मोबाइल चार्ज करते हैं।
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बैरकों में रहता है 24 घंटे पहरा
जेल के भीतर बिजली के सॉकेट बैरकों के बाहर लगे हैं, जहां वार्डर व रक्षाबंदियों का चौबीस घंटे पहरा रहता है। अलबत्ता यहां से चार्जिंग सीधे तौर पर नहीं की जा सकती। इसी तरह जेल में वायरिंग भी पूरी तरह से अंडरग्राउंड है। साथ ही साथ जेल में ही अपने विरोधियों के मध्य मोबाइल चार्जिंग करना जोखिम भरा होता है। एक-दूसरे की शिकायत का भी भय रहता है। ऐसे में चार्जिंग प्रत्यक्ष रूप से नहीं की जा सकती।
कर्मचारियों की भूमिका भी संदेहास्पद
- कुछ वर्ष पूर्व वायरल हुए वीडियो में कुछ वार्डर बंदियों को मोबाइल बेचते दिखे थे। अभी हाल ही में संदिग्ध गतिविधियों में शामिल वार्डर सस्पेंड किया गया। उस पर भी सामान उपलब्ध करवाने के आरोप लगाए गए थे।
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जेल में कहां से मिलता है बरामद सामान
- मोबाइल, बैटरी, चार्जर व अन्य अवैध सामान फर्श के नीचे, कच्ची जमीन या बैरकों में लगे पेड़, बाथरूम व चाहरदीवारी के साथ पैकेट में मिलते हैं। पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज ज्यादातर एफआईआर में ऐसा ही जिक्र किया जाता है।
अवश्य ही बैटरी चार्जिंग के लिए जुगाड़ करते हैं लेकिन हमारी जानकारी में ऐसा नहीं है, क्योंकि हम तो सामान पकड़ने के बाद पुलिस को शिकायत देकर कार्रवाई के लिए लिख देते हैं। पूछताछ का अधिकार हमें नहीं है, पुलिस को है, वही बेहतर बता सकते हैं। हमारा काम तो जेल में अवैध सामान पहुंचने से रोकना है।
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- लखबीर सिंह, सेंट्रल जेल अधीक्षक
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