हरिंदर पाल सिंह
अंबाला। अंबाला रेल मंडल के अधीन चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन को भविष्य की जरूरतों के मुताबिक तैयार करने के लिए रेल मंत्रालय ने कमर कस ली है। वर्ष 2030 तक स्टेशन की क्षमता को दोगुना करने के लक्ष्य के साथ अब यहां के बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) को अपग्रेड करने की कवायद तेज हो गई है। ताजा प्रस्ताव के अनुसार, चंडीगढ़ से संचालित होने वाली ट्रेनों की संख्या में भारी बढ़ोतरी की योजना है, जिसके लिए मौजूदा रख-रखाव की सुविधाएं नाकाफी साबित हो रही हैं।
हर सप्ताह चलेंगी 76 अतिरिक्त ट्रेनें
रेलवे के एक उच्च स्तरीय दस्तावेज के आधार पर, चंडीगढ़ स्टेशन से बनकर चलने वाली ट्रेनों की संख्या को दोगुना करने का प्रस्ताव है। इसका अर्थ है कि भविष्य में प्रति सप्ताह 76 अतिरिक्त ट्रेनें इस स्टेशन से अपनी यात्रा शुरू करेंगी। वर्तमान में स्टेशन पर ट्रेनों के रखरखाव के लिए केवल दो वाशिंग लाइन और एक आरपीसी-चतुर्थ लाइन उपलब्ध है। इतनी बड़ी संख्या में नई ट्रेनों के संचालन के लिए यह ढांचा पर्याप्त नहीं है।
यह है प्रस्ताव
बढ़ते ट्रैफिक और मेंटेनेंस की जरूरतों को देखते हुए प्रशासन से अतिरिक्त सुविधाओं की मांग की गई है। ट्रेनों की बेहतर सफाई और रखरखाव के लिए एक नई अतिरिक्त वाशिंग लाइन, कोच मेंटेनेंस यानि ट्रेनों की तकनीकी जांच और सुरक्षा मानकों को कम समय में पूरा करने के लिए आधुनिक आरपीसी-चतुर्थ लाइन की जरूरत है।
2030 के विजन पर फोकस
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि 2030 तक चंडीगढ़ एक बड़े रेल हब के रूप में उभरेगा। यदि समय रहते मेंटेनेंस लाइनों का विस्तार नहीं किया गया, तो परिचालन क्षमता पर बुरा असर पड़ सकता है। फिलहाल इस प्रस्ताव की समीक्षा की जा रही है और जल्द ही इस पर अंतिम मुहर लगने की उम्मीद है।
स्टेशन की क्षमता दोगुनी करने के लिए बुनियादी ढांचे का विस्तार अनिवार्य है। नई वाशिंग लाइन और आरपीसी-चतुर्थ सुविधाओं से ट्रेनों के टर्न-अराउंड समय में सुधार होगा। इसका प्रस्ताव तैयार किया गया है जोकि जल्द ही मान्यता के लिए रेलवे बोर्ड के पास भेजा जाएगा।
- विनोद भाटिया, डीआरएम, अंबाला।
अंबाला रेल मंडल के अधीन चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन। रेलवे