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जादूगरी के जरिये दिखाई जीने की राह

Sat, 13 Aug 2016 12:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/अंबाला कैंट।
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अंबाला सिटी। स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में शुक्रवार को अंबाला सेंट्रल जेल अथॉरिटी ने बंदियों व कैदियों के लिए एक जागरूकता कार्यक्रम के तहत निशुल्क मैजिक शो का आयोजन कराया। इस दौरान जादूगरी के जरिये बंदियों को जीने की राह दिखाई गई।
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मैजिशिएन आंचल, टीम डायरेक्टर गिरधारी लाल, तारा कुमावत समेत सभी कलाकारों का स्वागत किया। उसके बाद मैजिशिअन आंचल ने अपने शो की शुरुआत की। ग्यारह लोगों की टीम के साथ जादूगर आंचल ने स्टेज पर बंदियों और कैदियों को जादूगरी की कई आइटम दिखाकर उनका खूब मनोरंजन किया।
बाकायदा आंचल ने कैदियों को स्टेज पर बुलाकर उनके साथ मैजिक ट्रिक्स दिखाकर सभी को हैरान कर खूब तालियां बटोरीं। इस मनोरंजन के दौरान आंचल ने बंदियों के लिए तैयार की गई अपनी खास प्रस्तुति पेश करते हुए उन्हें संबोधित किया। आंचल ने बंदियों को इस बात का अहसास करवाया कि उनसे अपराध जाने-अनजाने में भले ही हो गया हो, लेकिन यहां उनकी जिंदगी खत्म नहीं होती।
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उन्हें यहां से जाने के बाद एक नए मिशन के साथ अपनी जीवन जीना है। आंचल ने इस दौरान कई ऐसे उदाहरण देते हुए बंदियों को छूटने के बाद देश व अपने परिवार के लिए नई जिंदगी जीने का संकल्प भी दिलवाया। उन्होंने सभी से बेटियों को बचाने और कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ जनमत तैयार करने का भी आह्वान किया। इसी प्रस्तुति के दौरान बंदियों और कैदियों की आंखें नम हो गईं। उन्होंने भी नए सिरे से अपना जीवन जीने की इच्छा जताई। अंत में जेल उपाधीक्षक डॉ. राजीव ने पूरी मैजिशिअन टीम को स्मृति के तौर पर धार्मिक ग्रंथ देकर सम्मान से नवाजा। टीम डायरेक्टर गिरधारी लाल व तारा कुमावत ने भी इस अवसर पर अंबाला सेंट्रल जेल अथॉरिटी का आभार जताया। इस अवसर पर जेल अधीक्षक एसपीएस चौहान बतौर मुख्य अतिथि व जेल उपाधीक्षक डॉ. राजीव और विशाल छिब्बर बतौर सम्मानित अतिथि मौजूद रहे।

इंजीनियर मां-बाप की बेटी जादूगर
जेल अथॉरिटी में कैदियों, बंदियों से रूबरू होते हुए मैजिशिअन आंचल के पिता व टीम डायरेक्टर गिरधारी लाल ने बताया कि वे खुद माइनिंग इंजीनियर हैं और उनकी पत्नी तारा कुमावत इलेक्ट्रिकल इंजीनियर है। लेकिन पांच साल की उम्र में उनकी बेटी आंचल ने 1997 में स्कूल के वार्षिक उत्सव में अपनी इस कला का स्कूल स्तर पर प्रदर्शन करते हुए खूब तालियां बटोरीं। बेटी बड़ी होती गई और उसका झुकाव जादू कला की ओर ही बढ़ता चला गया। उसने मनोविज्ञान में एमए की और जादूगरी की बारीकियां भी सीखीं।
उनके अनुसार अपनी बेटी की कामयाबी के लिए उन्होंने और उनकी पत्नी ने अपने इंजीनियरिंग की सर्विस छोड़ दी और बेटी का ही करियर बनाने में जुट गए। उन्होंने बताया कि 24 वर्षीय आंचल अब तक 9970 मैजिक शो देश और विदेश में कर चुकी है। उन्होंने अब इस व्यवसाय को जागरूकता अभियान की तरफ मोड़ दिया है। उनकी पूरी टीम इस जादू कला से समाज को जागरूक करने में जुट गई है। जिसमें उनका बारहवीं कक्षा में पढ़ रहा बेटा गुरु भी अपना सहयोग दे रहा है।
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