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मिड डे मील : आपूर्ति ज्यादा, आटा हो रहा खराब

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वैभव शर्मा
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अंबाला। शिक्षा विभाग ने मिड डे मील में आटा को शामिल किया, लेकिन अब इसमें घाटा होता दिखाई दे रहा है। कारण है कि प्रदेश के कई जिलों के स्कूलों में तीन-तीन महीने का स्टॉक भेज दिया गया। वहीं कुछ जिलों में डेढ़ से दो महीने का स्टॉक हैफेड के माध्यम से भेजा गया। अब यह आटा स्कूलों के लिए सिरदर्द बन गया है, क्योंकि आटा लगभग 10 से 15 दिनों के बाद खराब होने लगता है। हुआ भी ऐसा ही, कई स्कूलों में आटा खराब हो गया और शिक्षकों को आटे के पैकेट वापस करने पड़े। शिक्षकों का एक स्वर में यही कहना है कि जब हम घर पर 10 दिनों से अधिक रखा हुआ आटा नहीं खा सकते हैं तो सरकारी स्कूलों में बच्चों को क्यों खिलाएं।
आटा पड़ गया काला, वापस कराना पड़ा स्टॉक

अंबाला के नारायणगढ़ में डेढ़ महीने का आटे का स्टॉक सरकारी स्कूलों में भेज दिया गया। यह आटा कुछ ही दिनों में खराब हो गया। इस मामले में जब शिक्षकों ने शिक्षाधिकारी को बताया तो आनन-फानन में नारायणगढ़ में सप्लाई किया गया आटा हैफेड को वापस करना पड़ा गया।
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राजकीय प्राथमिक पाठशाला पंजाला में हेड टीचर और हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के जिला सचिव सतनाम सिंह ने बताया कि दो क्विंटल आटा के पैकेट दिए गए थे। यह आटे के पैकेट करीब 10 सितंबर को मिले थे, जिन पर छह अक्टूबर की एक्सपायर तिथि छपी हुई थी। इसमें 18 दिन बाद ही खटास आने लगी। ऐसे में दो क्विंटल आटे में से 40 किलोग्राम आटा खर्च हुआ, बाकी वापस कर दिया गया। इससे पहले बीईओ कार्यालय में ज्ञापन दिया गया था कि आटे में कुछ दिन के भीतर ही कालापन आ गया। इसके बाद जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी ने सभी स्कूलों से आटे को वापस करा दिया था। अंबाला में पहली कक्षा से आठवीं कक्षा तक 55 हजार बच्चे हैं, जिन्हें मिड डे मील दिया जाता है। पहली से 5वीं तक 100 ग्राम, छठी से आठवीं तक बच्चों को 150 ग्राम की प्रतिदिन डाइट दी जाती है। इसी तरह पहली से पांचवीं तक प्रत्येक बच्चे को 5.45 रुपये और अन्य बच्चों को 8.17 रुपये कुकिंग कास्ट मिलती है।
नवंबर में एक्सपायरी तिथि, सितंबर के आखिरी में थमाया तीन महीने का स्टॉक

हिसार के एक सरकारी स्कूल में सितंबर माह के आखिर में तीन महीने के आटे का स्टॉक भिजवाया गया है, जिसमें 26 सितंबर को करीब एक हजार किलोग्राम से अधिक आटा स्कूल को भेज दिया गया। शिक्षकों ने देखा तो पता चला कि इस आटे के बैगों पर चार नवंबर की एक्सपायरी तिथि अंकित है। ऐसे में अब शिक्षक आटा वापस करने की मांग कर रहे हैं।



शिक्षक ने सजगता दिखाते हुए नहीं लिया अधिक स्टॉक

राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ हरियाणा के पानीपत से जिला संघ संस्थापक सुरेंद्र राठी ने बताया कि उनके स्कूल में भी अधिक आटा भेजा जा रहा था, मगर उन्होंने सजगता दिखाते हुए अधिक आटा लेने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि जब हम नहीं खा सकते ताे बच्चाें के स्वास्थ्य के साथ क्यों खिलवाड़ करें। उन्होंने महज 40 किलोग्राम ही आटा लिया। कई अन्य स्कूलों में आटा भिजवाया गया है, जिन्होंने स्टॉक कम करने के लिए नहीं कहा होगा वहां पर आटा निश्चित तौर पर खराब होगा। आटा का सीमित स्टॉक ही स्कूलों को दिया जाना चाहिए।
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शिक्षकों ने उठाई मांग, गेहूं ही उपलब्ध कराए सरकार

शिक्षकों का कहना है कि शिक्षा विभाग आटे के स्थान पर उन्हें पहले की तरह गेहूं उपलब्ध करा दे, वह अधिक ठीक है। नहीं तो इसी प्रकार से आटा खराब होता रहेगा। अगर आटा ही भेजना है बच्चों के स्वास्थ्य को देखते हुए सिर्फ 15 दिन का ही स्टॉक दिया जाए। इसके साथ ही स्कूलों में आटा रखने के लिए स्टोरेज की भी व्यवस्था करनी होगी। इसके लिए मुख्य रूप से कंटेनर भी उपलब्ध कराए जाने चाहिए।
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