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Ambala News: शहीद पवन की वर्दी दिलाती है याद, सुनाई देती हैं आवाजें

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नारायणगढ़। वर्ष 1999 को कारगिल में उपमंडल गांव गदौली के 28 वर्षीय पवन कुमार सैनी शहीद हुए थे। जब पवन कुमार शहीद हुए तो उस समय उनकी शादी रखी थी और दो माह की छुट्टी पर उन्हें अपने घर आना था। आज भी उनकी माता सरदारी देवी उनको याद करते हुए भावुक हो जाती हैं।
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शहीद पुत्र को मिली वर्दी, कपड़े, मेडल, संदूक फोटो सहित अन्य सामान एक कमरे में रखा है। शहीद पवन कुमार सैनी के नाम का पेट्रोल पंप नारायणगढ़ साढौरा मार्ग पर गांव बरसूमाजरे में स्थित है, जहां उनकी एक प्रतिमा भी लगी है। उनके परिवार में उनके बड़े भाई दिवंगत रामजी लाल का पुत्र जसविंद्र सिंह, शहीद का बड़ा भाई कृष्ण लाल और उनका पुत्र सौरव, उनकी माता सरदारी देवी हैं। गांव गदौली में स्थित सरकारी स्कूल का नाम भी शहीद पवन कुमार सैनी के नाम पर रखा हुआ है। शहीद की माता सरदारी देवी का कहना है कि पवन कुमार की आवाजें अब भी उन्हें व भाईयों को सुनने को मिलती हैं।
यहां पर तीन सितंबर को प्रति वर्ष श्रद्धांजलि दिवस मनाया जाता है। उल्लेखनीय है कि टॉप पोस्ट कारगिल में पाकिस्तान से मात्र 60 गज की दूरी पर दुश्मन की सेना से लोहा लेते हुए 31 अगस्त 1999 को शहादत देने वाले शहीद पवन कुमार की शहादत पर न केवल नारायणगढ़ को बल्कि हरियाणा को भी गर्व हुआ था। शहीद पवन की पार्थिव देह 3 सितम्बर 1999 को गांव में पहुंची थी और पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया था। वर्ष 1971 में ईस्सर राम निवासी गदौली के घर पैदा हुये शहीद पवन मात्र 19 साल की उम्र में सेना में भर्ती हो गये थे तथा उन्होंने 28 वर्ष की आयु में शहादत पाई थी।
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