अंबाला। करवा चौथ पर्व को लेकर शहर के विभिन्न बाजारों में महिलाओं की भीड़ उमड़ी। वहीं ज्यादातर महिलाएं जमकर खरीदारी करती दिखाई दी। ट्विनसिटी के विभिन्न बाजारों में सुहागिनें मेहंदी लगवाने के लिए बारी का इंतजार करती रही। सुहागिनें सजने संवरने के लिए बाजारों में चूड़ियां अपने लिबाज से मैचिंग करके खरीदारी कर रही थी। सिटी होलसेल मार्केट शुकलकुंड रोड स्थित बैंगल्स स्टोर में महिलाओं ने जमकर खरीदारी की। बैंगल स्टोर के संचालक संजय कुमार ने बताया कि बीते कई दिनों से प्रतिदिन भारी संख्या में महिलाएं चूड़ियों की खरीदने के लिए दुकान पर पहुंच रही हैं।
इस बार सुहागिनों के लिए मुंबई, महाराष्ट्र, बैंगलोर, गुजरात व राजस्थान आदि राज्यों से चूड़ियों की स्पेशल वैरायटी मंगवाई गई थी जोकि महिलाओं को खूब पसंद आ रही हैं। बुधवार को महिलाओं की भारी भीड़ खरीदारी करने के लिए दुकान पर पहुंची। महिलाओं को चूड़ियां आदि की खरीदारी करने के लिए आधा घंटे इंतजार करना पड़ा। इसी प्रकार शहर के कपड़ा मार्केट में भी दिनभर महिलाओं का चहलकदमी जारी रही। महिलाओं ने विशेष तौर पर तैयार लहंगा, गाउन, सरारा सूट व साड़ियों की खरीदारी की।
करवा चौथ की कथा का विशेष महत्व क्या है
करवा चौथ की कहानी में बताया गया है कि देवी करवा अपने पति के साथ तुंगभद्रा नदी के पास रहती थी। एक दिन करवा के पति नदी में स्नान करने गए तो मगरमच्छ ने उनका पैर पकड़ लिया और नदी में खींचने लगा। मृत्यु करीब देखकर पति ने करवा को पुकारा। करवा दौड़कर नदी के पास पहुंचकर देखती है कि पति को मगरमच्छ मृत्यु के मुंह में ले जा रहा है। करवा ने तुरंत एक कच्चा धागा लेकर मगरमच्छ को एक पेड़ से बांध दिया। करवा के सतीत्व के कारण मगरमच्छ कच्चे धागे में ऐसा बंधा की टस से मस नहीं हो पा रहा था। करवा के पति व मगरमच्छ दोनों के प्राण संकट में थे। करवा ने यमराज को पुकारा और अपने पति को जीवनदान देने व मगरमच्छ को मृत्युदंड देने के लिए कहा। यमराज ने कहा मैं ऐसा नहीं कर सकता, क्योंकि अभी मगरमच्छ की आयु शेष है और तुम्हारे पति की आयु पूरी हो चुकी है। क्रोधित होकर करवा ने यमराज से कहा, अगर आपने ऐसा नहीं किया तो मैं आपको श्राप दे दूंगी। सती के श्राप से भयभीत होकर यमराज ने तुरंत मगरमच्छ को यमलोक भेज दिया और करवा के पति को जीवनदान दिया। इसलिए करवाचौथ के व्रत में सुहागिन स्त्रियां करवा माता से प्रार्थना करती हैं कि हे करवा माता जैसे आपने अपने पति को मृत्यु के मुंह से वापस निकाल लिया था, वैसे ही मेरे सुहाग की भी रक्षा करना।
पर्व का बेसब्री से किया इंतजार
करवा चौथ पर्व का बहुत बेसब्री से इंतजार किया जाता है। इस पर्व पर विशेष तौर पर सजने संवरने के लिए मौका मिलता है। इस दिन सुंदर दिखाई देने के लिए हर प्रकार का शृंगार आदि किया जाता है।
-नेहा, निवासी जींद हाउस, सिटी।
सुहागिनों का विशेष पर्व
करवा चौथ का पर्व सुहागिनों के लिए विशेष पर्व माना जाता है। सुहागिनें पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं और विधिवत तरीके से पूजा अर्चना कर करवा चौथ की कथा का श्रवण भी करती हैं।
-बेबी, निवासी दुर्गानगर, सिटी।
सभी नियमों का करती पालन
सुहागिन पति की दीघार्यु के लिए श्रद्धा पूर्वक व्रत रखकर नियमों का पालन करती हैं। पूरा दिन भूखा रहकर व्रत रखा जाता है। चंद्रमा उदय होने पर ही पति के हाथों से ही व्रत को संपूर्ण किया जाता है।
-गीता सैनी, निर्मल विहार, सिटी।
आधा घंटा किया इंतजार
बुधवार को सुबह से महिलाएं चूड़ियों की खरीदारी कर रही हैं। भारी भीड़ के कारण आधे घंटे तक इंतजार कर रही हैं। महिलाएं पहने जाने वाले लिबाज से मैच करके चूड़ियों की खरीदारी कर रही हैं।
-संजय कुमार, संचालक स्वास्तिक बैंगल्स स्टोर, शुकुलकुंड रोड, सिटी।
प्रथा के अनुसार रखती हैं व्रत
शास्त्रों के अनुसार पति की दीघार्यु एवं अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए इस दिन भालचंद्र गणेश जी की अर्चना की जाती है। करवाचौथ में भी संकष्टीगणेश चतुर्थी के जैसे दिनभर उपवास रखकर रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के उपरांत ही भोजन करने का विधान है। वर्तमान समय में करवाचौथ व्रतोत्सव महिलाएं परिवार में प्रचलित प्रथा के अनुसार ही मनाती हैं। अधिकतर स्त्रियां निराहार रहकर चंद्रोदय की प्रतीक्षा करती हैं।
- पंडित रोहित शास्त्री, बागशाही बाग गुरुद्वारा कॉलोनी, सिटी।
विधिवत तरीके से संपूर्ण करती व्रत
कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को करकचतुर्थी करवा चौथ व्रत करने का विधान है। इस व्रत की विशेषता यह है कि केवल सौभाग्यवती स्त्रियों को ही यह व्रत करने का अधिकार है। स्त्री किसी भी आयु, जाति, वर्ण, संप्रदाय की हो, सबको इस व्रत को करने का अधिकार है। जो सौभाग्यवती स्त्रियां अपने पति की आयु, स्वास्थ्य व सौभाग्य की कामना करती हैं वह इस व्रत को श्रद्धा पूर्वक विधिवत तरीके से संपूर्ण करती हैं।
- पंडित धर्मपाल शर्मा, निवासी शर्मा कौलोनी, सिटी।
जीवन भर रख सकती हैं व्रत
यह व्रत 12 वर्ष तक अथवा 16 वर्ष तक निरंतर प्रति वर्ष किया जाता है। अवधि पूरी होने के पश्चात इस व्रत का उद्यापन अर्थात उपसंहार किया जाता है। जो सुहागिन स्त्रियां आजीवन रखना चाहें, वह जीवनभर इस व्रत को कर सकती हैं। इस व्रत के समान सौभाग्य दायक व्रत अन्य कोई दूसरा नहीं है। अर्थात सुहागिन स्त्रियां अपने सुहाग की रक्षार्थ इस व्रत का सच्चे मन से पालन करती हैं और शाम को व्रत पूर्ण करती हैं।
- पंडित भगवती प्रसाद, पुजारी श्री महादेव नीलकंठ मंदिर सेक्टर सात, सिटी।
चौथ माता के मंदिर का ज्यादा महत्व
भारत देश में वैसे तो चौथ माता जी के कई मंदिर स्थित हैं लेकिन सबसे प्राचीन एवं सबसे अधिक ख्याति प्राप्त मंदिर राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले के चौथ का बरवाड़ा गांव में स्थित है। चौथ माता के नाम पर इस गांव का नाम बरवाड़ा से चौथ का बरवाड़ा पड़ गया। मंदिर की स्थापना महाराजा भीमसिंह चौहान ने की थी। यहां करवा चौथ के दिन दूर दराज व विभिन्न राज्यों से भक्तजन मात्था टेकने के लिए पहुंचते हैं।
- पंडित कन्हैया लाल, सेक्टर नौ, अंबाला सिटी।