अंबाला। जिले में तीन मिलीमीटर बारिश ने जलभराव नहीं होने के प्रशासन के दावों पर पानी फेर दिया। शहरी क्षेत्र कम बारिश के कारण बच गया मगर ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया।
पहाड़ों में बारिश के कारण मारकंडा नदी में पानी का स्तर बढ़ गया। इससे आसपास के गांवों के लोगों को परेशानी हुई और शहजादपुर में सबसे अधिक लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ा। यहां बारिश के कारण अंबाला-शहजादपुर राजमार्ग जलमग्न हाे गया। इस दौरान लोगों के वाहन पानी के कारण बंद होते दिखे। आसपास के खेतों में भी पानी भर गया।
स्थानीय निवासियों की मानें तो मंगलवार रात्रि से लेकर बुधवार दोपहर एक बजे तक बारिश हुई। राष्ट्रीय राजमार्ग 344 अंबाला हरिद्वार पर शहजादपुर के पास सर्विस लेन पर घुटनों तक पानी भर गया। जिसके कारण लोग एनएच पर भी नहीं चढ़ पा रहे थे। पानी का स्तर कुछ इस तरह था कि बड़े वाहनों के पहिये भी डूबते दिखे। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार 26 से 28 तक बारिश का येलो अलर्ट है। इस दौरान हल्की बारिश हो सकती है।
बस स्टैंड पर भी भर गया पानी
बारिश में जलभराव ने शहजादपुर के शहरी इलाके तक को प्रभावित किया। यहां अंबाला देहरादून राजामार्ग पर जलभराव हो गया। यह राजमार्ग शहर में होते हुए बस स्टैंड के पास से गुजरता है। ऐसे में बस स्टैंड में भी जलभराव देखने को मिला। इसके कारण स्थानीय दुकानदारों का भी काम काज प्रभावित हुआ। दोपहर तक पानी का स्तर अधिक कम नहीं हुआ था। इसी प्रकार नारायणगढ़ कालाआंब रोड पर डेरा गांव के मुख्य द्वार पर भी बारिश का पानी काफी मात्रा में रहा। जहां से ग्रामीणों का निकलना मुश्किल हुआ।
अंबाला शहर और कैंट में मौसम सुहाना
शहर और कैंट में भी मंगलवार रात्रि से ही बारिश शुरू हो गई थी। बुधवार सुबह कुछ देर के लिए बारिश बंद हुए मगर इसके बाद बूंदाबांदी दोपहर तक चली। बारिश के कारण हिमाचल की पहाड़ी साफ दिखाई दीं। सुबह ही कुछ देर के लिए आसमान में काले बादल छा गए। इस कारण दिन में ही अंधेरा हो गया था। वहीं, कुछ स्थानों पर हल्का जलभराव भी हो गया। यही हाल छावनी के बस स्टैंड पर दिखाई दिया।
दिन और रात में घटा तापमान का अंतर
बारिश के कारण अधिकतम तापमान 27.2 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया है। रात का तापमान 25.9 डिग्री सेल्सियस रहा। दिन और रात के तापमान का अंतर कम हो गया है। दोनों तापमान में दो डिग्री सेल्सियस का ही अंतर है। एक तरफ जहां लोगों को परेशानी हुई तो वहीं दूसरी तरफ धान की खेती करने वाले किसानों को राहत मिली है। उन्हें अब सिंचाई नहीं करनी होगी। वह आसानी से धान की बुवाई कर सकेंगे।