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उपराष्ट्रपति का मजाक उड़ाना निंदनीय : विज

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अंबाला। भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का तृणमूल के सांसद कल्याण बनर्जी द्वारा मजाक उड़ाना निंदनीय है। कल्याण बनर्जी को संसद से बर्खास्त कर किसी चिडिय़ाघर में भर्ती करवा देना चाहिए। उक्त जानकारी पत्रकार द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए हरियाणा के गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने दिया। उन्होंने कहा कि उपराष्ट्रपति का जिस प्रकार सांसद कल्याण बनर्जी ने मजाक उड़ाकर अपमान किया वह निंदनीय है।
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उनकी राज्यसभा सदस्यता खत्म कर, उन्हें किसी चिड़ियाघर में भर्ती करा देना चाहिए। वहीं सपा प्रमुख अखिलेश यादव के बयान कि जब सांसदों को निलंबित ही करना था, तो फिर नई संसद का बनवाने पर पलटवार करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि नई संसद आराम से अपनी बात रखने के लिए बनाई गई है। आपको संसद में अपनी बात रखने के लिए भेजा जाता है न कि वहां जाकर व्यवधान पैदा करने के लिए। गृह मंत्री ने कहा कि संसद और विधानसभा बनती है, लोगों की बात कहने के लिए न कि वहां जाकर दंगा करने के लिए। बातचीत के लिए सांसदों को बुलाया गया मगर वह बातचीत के लिए भी नहीं आ रहे। इनका मकसद हर सत्र में जाकर संसद के कार्य को रोकना है। वहीं रणदीप सुरजेवाला के बयान पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि विरोध जताने के कई तरीके है, मगर लोकसभा में कूद जाना छोटा नहीं है, यह बड़ा मामला है और इसके पीछे बड़ी ताकत है।

अच्छी बात, पाकिस्तान को आ रहा समझ
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री के बयान कि पाकिस्तान की बदतर हालत के लिए भारत जिम्मेदार नहीं है, बल्कि हमने अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है। इस पर गृह मंत्री ने कहा, अगर पाकिस्तान को समझ आ रहा है तो बहुत अच्छी बात है, वरना वक्त तो बड़े-बड़े को बहुत कुछ सिखा देता है। वहीं, विपक्षी गठबंधन इंडिया की बैठक में मल्लिकार्जुन खरगे का नाम प्रधानमंत्री पद के लिए प्रस्तावित किया गया, मगर केजरीवाल के अलावा किसी अन्य ने समर्थन नहीं करने के सवाल पर गृह मंत्री ने कहा कि सूचना यहीं आ रही है कि खरगे का नाम प्रस्तावित किया गया और राहुल गांधी को रिजेक्ट कर दिया गया है।
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विधानसभा में दिया जाता है बोलने का समय
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा द्वारा विधानसभा सत्र अल्प अवधि रखने के आरोपों पर गृह मंत्री ने कहा कि जितना समय इस विधानसभा में विपक्षी सदस्यों को बोलने के लिए दिया जाता है, उतना आज से पहले किसी विधानसभा में नहीं हुआ। वह छह बार के विधायक हैं और उन्हें थोड़ा बोलने के लिए भी संघर्ष करना पड़ता था और मार्शल हमें उठा-उठाकर बाहर फेंकते थे। अब तो सभी विधायकों को बोलने का समय दिया जाता है और यदि किसी को बोलना ही न आए तो हम उसमें कुछ नहीं कर सकते।
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