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Ambala News: टांगरी में गिर रही महेश नगर ड्रेन की गंदगी, पानी हुआ जहरीला

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महेश नगर ड्रेन से गिरता हुआ गंदा पानी। संवाद
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- बदबू के कारण नदी के किनारों से गुजरना भी मुश्किल, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की धरातल पर नहीं उतर रही योजना
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माई सिटी रिपोर्टर

अंबाला। हरियाणा की नदियों को स्वच्छ बनाने के सरकारी दावों की हकीकत दम तोड़ती नजर आ रही है। मारकंडा नदी के बाद अब टांगरी नदी की बदहाली ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोमवार को की गई पड़ताल में सामने आया कि महेश नगर ड्रेन का दूषित पानी बिना किसी ट्रीटमेंट के नालों के जरिए सीधे टांगरी नदी में प्रवाहित किया जा रहा है। अंबाला कैंट के बाजार और रिहायशी इलाकों से पानी महेश नगर ड्रेन में आता है। इस कारण से नदी का पानी काला और जहरीला हो चुका है। स्थिति ये है कि नदी के किनारों पर लगे कचरे के ढेरों से उठती सड़ांध के कारण यहां से गुजरना भी मुश्किल हो रहा है।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) नदियों में सीधे तौर पर सीवरेज और कचरा गिराने को लेकर सख्त है। बावजूद इसके अंबाला में घरों से निकलने वाला प्लास्टिक और ठोस कचरा नदी के गंदे पानी के साथ बहता दिखाई देता है। साथ ही टांगरी के साथ बनी अवैध कॉलोनियों के नाले तो हैं मगर इन नालों की निकासी सीधे टांगरी में हो रही है। इस स्थिति को लेकर नगर परिषद के पास कोई एक्शन प्लान ही नहीं है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत शत प्रतिशत कचरे के निस्तारण का दावा किया जाता है फिर टांगरी नदी में यह घरेलू कचरा कहां से पहुंच रहा है।
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पानी का रंग हुआ काला

हिमाचल से आने वाली टांगरी नदी बरसाती नदी है। बारिश के दिनों में दो बार अंबाला छावनी के लोग इसका रौद्र रूप देख भी चुके हैं। बारिश के बाद इस नदी में धड़ल्ले से नालों का पानी गिराया जाता है, जिससे इसके पानी का रंग काला हो चुका है। पानी से दुर्गंध भी आ रही है। यह नदी इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि इसका पानी आगे चलकर कुरुक्षेत्र में मारकंडा नदी में मिलता है। ऐसे में यह गंदा पानी मारकंडा को भी प्रदूषित करता है। सिर्फ इतना ही नहीं टांगरी नदी की हालत तो ऐसी है कि इस पर किसी का ध्यान तक नहीं है। हरियाणा में तो यह नदी प्रदूषित हो ही रही है पंजाब से भी यह हरियाणा में प्रदूषण लेकर आ रही है। नदी में प्रदूषण इस स्तर का है कि यहां जलीय जीवन की तो कल्पना ही नहीं की जा सकती है।
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एनजीटी में पेश की थी रिपोर्ट

हाल ही में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एनजीटी में सुनवाई से पहले नदियों में पानी की सैंपलिंग की थी, जिसमें पानी मानकों के विपरीत मिला था। इसके बाद संबंधित विभागों से एक्शन प्लान मांगा गया था, जिसमें विभागों ने टांगरी नदी में नाला सीधे गिरने से बचाने को एसटीपी का सुझाव तो दिया है मगर इसके निर्माण में दो वर्ष तक का समय लगने की बात कही गई है। विभाग ऐसी रियायतें पहले भी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सामने रख चुका है।

महेश नगर ड्रेन से गिरता हुआ गंदा पानी। संवाद

महेश नगर ड्रेन से गिरता हुआ गंदा पानी। संवाद

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