गांव में ठंडे सर्द मौसम में अमर शहीद के जयकारों की गूंज से माहौल गरम बना हुआ था। भीगी पलकें लिए ग्रामीण सुबह से ही गांवों की गलियों में खड़े अपने शूरवीर शहीद पूत का इंतजार कर रहे थे।
शहीद की मां, बहनें और पत्नी गहरे सदमे में थी। उनकी जुबां तो बंद थी, लेकिन पथराई आंखें अपने भाई, बेटे और पति के शव के इंतजार कर रही थी। शमशान घाट को पूरी तरह से साफ कर दिया गया था। तभी अंबाला एयरफोर्स अथॉरिटी की ओर से पिता को फोन आया कि कुछ ही देर में शव गांव की सीमा में पहुंच रहा है।
सोमवार सुबह करीबन साढ़े नौ बजे एयरफोर्स, प्रशासन, मंत्री, विधायक व अफसरों की गाड़ियों का काफिला शव वाहन के साथ गांव गरनाला की हद में पहुंच गया। शहीद कमांडो गुरसेवक के शव को एक विशेष वाहन में सजाकर लाया गया था। जैसे ये वाहन गांव की हद में पहुंचा, तभी अचानक एक ऐसा माहौल बना, जिसने वहां खड़े हर शख्स को भीतर तक झकझोर कर रख दिया।
तिरंगे में लिपटकर आ रहे अपने शहीद पूत को लेने के लिए सैकड़ों की तादाद में गांववाले गांव की सीमा पर ही सड़क के दोनों ओर तैयार खड़े थे, सड़क ही नहीं घरों की छतों पर खड़ी महिलाएं भी शूरवीर को आखिरी सलामी देने के इंतजार में थी। माहौल पूरी तरह से शांत था, लेकिन जैसे ही शहीद का शव वाहन गांव की सीमा में दाखिल हुआ, तो गांव की फिजा अमर शहीद के जयकारों से गूंजने लगी।
शव वाहन जैसे-जैसे आगे बढ़ता गया, वैसे-वैसे माहौल और ज्यादा गमगीन होता गया। चारों ओर से ग्रामीण इस शूरवीर पर फूलों की बौछार कर रहे थे। ग्रामीणों की जुबां पर एक ही बात थी कि आज म्हारे गुरसेवक ने गरनाला का नाम रौशन कर हम गांववालों का सीना फख्र से चौड़ा कर दिया।
घर पहुंचा शव, तो फूटा आंसुओं का सैलाब
शव वाहन उन्हीं गलियों से गुजरकर शहीद के घर पहुंचा, जिन गलियों में खेलकर कभी गुरसेवक बड़ा हुआ था। आज भी शहीद के यार उसके घर की दीवार के साथ पीठ लगाकर नम आंखों से अपने दोस्त के शव को चुपचाप निहार रहे थे। घर के भीतर मातम का सन्नाटा पसरा था, अचानक गुरसेवक का शव तिरंगे में लिपटकर घर में दाखिल हुआ, तो घर के भीतर से चीत्कारें बाहर आईं, ये चीत्कार थी काफी समय से सदमे में बैठी गुरसेवक की मां अमरीको और पत्नी जसप्रीत कौर की। जिसे सुनकर वहां खड़ा हर कोई फफक पड़ा। फिर तो वहां आंसुओं का ऐसा सैलाब बहा, जो रूक नहीं पाया। मां, पत्नी, बहनें व अन्य परिजन शहीद के शव से लिपटकर काफी देर तक बिलखते रहे और ग्रामीण उन्हे संभालने में जुटे रहे।
शव पर पत्नी ने उतारी सुहाग की चूड़ियां
18 नवंबर 2015 को कुराली की जसप्रीत से शहीद कमांडों गुरसेवक की शादी हुई थी। बहुत शौक से जसप्रीत ने हाथों में गुरसेवक के नाम की मेहंदी रचाई थी और सुहाग की चूड़ियां पहनी थी। लेकिन उसे क्या पता था, इन चूड़ियों को उसे अपने पति के शव पर उतारना पड़ेगा। काफी देर तक वे पति के शव के पास बैठी बिलखती रही। जबकि मां वहीं रो-रोकर बेहोश होती रही।
घरवालों ने पत्नी को कई बार वहां से उठाने की कोशिश की, ताकि दाह संस्कार की क्रिया को आगे बढ़ाया जा सके। लेकिन पत्नी शहीद के शव के पास से हिलने को तैयार नहीं थी। काफी मशक्कत के बाद परिजनों ने पत्नी के हाथों से सुहाग की चूड़ियां उतारनी शुरू की, तो पत्नी की हालत और बेहाल हो गई। जैसे-तैसे कर पत्नी की सुहाग की चूड़ियां उतारकर गुरसेवक के शव पर रखी गई और पत्नी को वहां से हटाया गया।
साथियों ने सैल्यूट कर दी आखिरी विदाई
अपने जांबाज साथी के शव को घर से लेकर शमशान घाट तक पहुंचाने के लिए एयरफोर्स के जवानों ने अलग अंदाज अख्तियार किया। उन्होंने ग्रामीणों से आग्रह कर उन्हे थोड़ा पीछे किया और शहीद के घर से लेकर शमशाम घाट तक सड़क के दोनों ओर एयरफोर्स के जवान तैनात हो गए। परिजनों ने करीबन पौने घंटे बाद घर से शहीद के शव को भारत माता के जयकारों, ‘जब तक सूरज चांद रहेगा, गुरसेवक तेरा नाम रहेगा’ और ‘शहीद गुरसेवक अमर रहे...’ के जयकारों के साथ उठाया और शमशान घाट की ओर बढ़ गए।
जैसे-जैसे शमशान घाट की ओर शव बढ़ता गया, सड़क के दोनों ओर खड़े सैकड़ों एयरफोर्स के जवानों ने अपने शहीद को सैल्यूट किया। गरनाला व आसपास के गांवों के हजारों लोग शव के पीछे शमशान घाट की ओर बढ़ते गए। शमशान घाट के आसपास बने भवनों की छतों तक पर लोगों ने शहीद के अंतिम दर्शन किए।
फौजी भाई ने शहीद को मुखाग्नि
शमशान घाट पर पहुंचकर शव को सम्मान के साथ दाह संस्कार के लिए तैयार किया गया। इस दौरान पिता सुच्चा सिंह, माता अमरीको, पत्नी जसप्रीत कौर, भाभी सुखविंद्र कौर, चचेरे भाई अमरीक सिंह, वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु, खेल मंत्री अनिल विज, खनन राज्यमंत्री नायब सैनी, इनेलो प्रदेशाध्यक्ष अशोक अरोड़ा, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर, प्रदेश सचिव हरीश सासन, उपाध्यक्ष निर्मल सिंह, इनेलो नेता ओंकार सिंह, पूर्व चेयरमैन नगर परिषद नीलम शर्मा, इनेलो नेता हरपाल सिंह कम्बोज, विधायक सिटी असीम गोयल, जिलाध्यक्ष जगमोहन कुमार, इनेलो नेता शीशपाल जंदेड़ी, भाजपा नेता रामबाबू नेता, पुलिस कमिश्नर ओपी सिंह, डीसी अशोक सांगवान, एसडीएम कैप्टन शक्ति सिंह, डीसीपी जश्नदीप सिंह रंधावा, आर्मी से लेफ्टिनेंट कर्नल एच. सकूर, एयरफोर्स ऑफिसर कमांडिंग तेजिंद्र सिंह, विंग कमांडर बीएस धनजंय व राजीव खेड़ा, एआईपीआरओ हरदीप सिंह समेत कई गणमान्य व्यक्तियों और ग्रामीणों ने शहीद को आखिरी नमन किया।
पुलिस और एयरफोर्स के जवानों ने फायरिंग कर शहीद को आखिरी सलामी दी। उसके बाद गुरसेवक के शहीद भाई फौजी हरदीप सिंह ने विधिविधान के साथ उसे मुखाग्नि देकर इस दुनिया से विदा कर दिया। दाह संस्कार के बाद आल इंडिया एंटी टेरोरिस्ट फ्रंट के अध्यक्ष मनिंद्रजीत सिंह बिट्टा, पूर्व मंत्री कैप्टन अजय यादव व पूर्व मंत्री विनोद शर्मा समेत अन्य लोग पीड़ित परिवार को घर पर सांत्वना देने पहुंचे। ये सिलसिला रात तक जारी रहा।