छावनी की लाइफ लाइन कहे जाने वाली सदर बाजार मार्केट इन दिनों मंदी की मार झेल रही है। हलवाई से लेकर, कपड़ा कारोबारी, स्वर्णकार, दवा, किराना और जूते-चप्पल और रोजमर्रा के जीवन से जुड़ी हर जरूरत की वस्तु इस बाजार से मिल जाती है। छावनी के सबसे पुराने इस बाजार में करीब 65 दुकानें हैं। 3 अप्रैल 2014 को इस बाजार को पूरी तरह से तोड़ दिया गया था। दुकानदारों ने दूसरे लॉकडाउन की तुलना उसी दौर से की है। कहा कि दूसरे लॉकडाउन की मार से 7 साल पहले हुई तबाही याद आ गई। उस दर्द के घाव अभी तक सीने पर थे और अब दूसरी लहर ने एक और दर्द दे दिया। दुकानदारों ने कहा कि पहली लहर में तो पैसे का आना-जाना लगा रहा, लेकिन दूसरी लहर में रुपये का रोटेशन ही रुक गया। अब यदि तीसरी लहर आ गई तो हम जीते-जी मर जाएंगे। दुकानदारों ने यह भी कहा कि सरकार यदि हमारे लिए कुछ करना चाहती है तो इतनी बड़ी इंडस्ट्री यहां स्थापित की जाए, जिससे हजारों लोगों को लोगों को रोजगार मिले।
पहले और दूसरे लॉकडाउन में हमने सरकार की पूरी मदद की। लेकिन सरकार ने हमारे लिए कुछ नहीं सोचा। हमारी दुकानें 6 माह से ज्यादा बंद रही। लेकिन हमने किराए पूरे दिए। इसी तरह बिजली बिल भी हमसे एवरेज बेस पर लिए गए जबकि सरकार को चाहिए था कि कम से कम इस अवधि के बिजली बिल माफ किए जाते। 2014 में जिस तरह हमें बर्बाद सरकार ने किया था उसी तरह अब कोरोना ने कर दिया। टीकाकरण करवाने में अभी भी पूरा बाजार सहयोग कर रहा है। कई दुकानदारों ने दोनों टीके लगवाने पर रिबेट की स्कीम भी बनाई है।
अजय गुलाटी, प्रधान सदर बाजार एसो.
2014 से लेकर हम आज तक नहीं उबर पाए। न ही सरकार ने हमें उबारने के लिए कोई कदम उठाया जबकि हर कारोबारी सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चला। अब यदि सरकार हमारे लिए कुछ करना चाहती है तो अंबाला में इंडस्ट्री स्थापित कर हजारों लोगों को रोजगार उपलब्ध करवाए तभी कारोबारी बच पाएंगे। हालांकि हम अपने ग्राहकों को आकर्षक छूट लाभ भी दे रहे हैं, लेकिन मंदी इतनी ज्यादा है कि ग्राहक मार्केट में है ही नहीं।
सुमन जैन, कपड़ा कारोबारी।
सरकार ने कारोबारियों को पहले और दूसरे लॉकडाउन में कोई रिबेट नहीं दी। पैसे की लेन-देन पूरी तरह से रुक गई। इससे उबरने के लिए हम आकर्षक छूट दे रहे हैं। इसके अलावा टीकाकरण करवाने आने वालों को भी आकर्षक स्कीम के तहत फायदा पहुंचा रहे हैं, लेकिन महंगाई और मंदी दोनों एक साथ आने से ग्राहक ही नहीं है।
धर्मेंद्र गुलाटी, जूता कारोबारी
लॉकडाउन में हाल यह थे कि न तो हम माल ला सके न ही दुकान खोल पाए। हम जैसे छोटे-छोट दुकानदारों की दुकानदारी पूरी तरह से ठप हो गई। अभी भी न तो माल मिल रहा है न ग्राहक हैं। ग्राहक आता है तो रेट सुनकर वापस चला जाता है। पीछे से ही रेट में इतनी तेजी हो गए हैं कि ग्राहक को समझाना चुनौती से कम नहीं है।
हिमांशु गुप्ता, जूता-चप्पल कारोबारी।
स्वर्ण कारोबारी हो कपड़ा या कोई अन्य कारोबारी, हर कोई अपने ग्राहक को आकर्षक योजनाओं के तहत आकर्षित करने का प्रयास कर रहा है। हम भी विशेष छूट दे रहे हैं। लेकिन अभी बाजार में मंदी बहुत ज्यादा है। इससे निकलने में हमें अभी कुछ समय लगेगा। सरकार को कारोबारियों के लिए राहत पैकेज की घोषणा करनी चाहिए
प्रेम जैन, कपड़ा कारोबारी।
पहली लहर में हमें इतनी दिक्कतें नहीं आई थी जितनी दूसरी में आई हैं। क्योंकि पहली लहर में बाजार में रोटेशन था। पैसा रोटेट होने से कोई दिक्कत नहीं थी। बिजनेस को प्रमोट करने के लिए छूट भी दे रहे हैं। लेकिन अब डेल्टा प्लस का डर सता रहा है। हम खुद तो टीकाकरण करवा चुके हैं और दूसरों को भी प्रेरित कर रहे हैं ताकि बाजारों को फिर से बंद करने की नौबत न आए।
राहुल, स्वर्ण कारोबारी।
कोरोना की दूसरी लहर के बाद से अब तक बाजार में ग्राहक नहीं हैं। शादी ब्याह में लोगों की संख्या समिति होने और कोई बड़ा आयोजन नहीं कर पाने के कारण बाजार पूरी तरह से पिट गया है। मंदी की मार पता नहीं हम कब तक झेलेंगे। सरकार से हर कोई उम्मीद करता है, लेकिन हमने तो अब उम्मीद ही छोड़ दी है, क्योंकि अभी तक किसी ने हमारे लिए कुछ नहीं सोचा।
सुनील मित्तल, महासचिव सदर बाजार एसोसिएशन